दून हॉराइज़न, देहरादून (7 सितम्बर): मूसलाधार बारिश और प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद राजधानी की सड़कें आज पूरी तरह सियासी रंग में रंगी नजर आईं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान, राज्य में लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटालों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Uttarakhand Congress) ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास घेराव (CM Awas Gherao) का व्यापक ऐलान किया।
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सुबह से ही देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में प्रदेश भर से कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। दोपहर होते-होते जनसैलाब कैंट रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ चला।
बारिश के बीच सड़कों पर टकराव और ट्रैफिक जाम
परेड ग्राउंड से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जैसे ही कनक चौक और सुभाष रोड की तरफ बढ़ा, पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की पूरी कोशिश की। कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की देखने को मिली। राजपुर रोड, एस्लेहॉल चौक और कैंट क्षेत्र की ओर जाने वाले तमाम प्रमुख रास्तों पर घंटों वाहनों की कतारें लग गईं, जिससे आम शहरियों को भी खासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।
गोदियाल का तीखा वार
प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने साफ शब्दों में कहा कि धामी सरकार की कार्यप्रणाली से समाज का हर तबका आजिज आ चुका है। हाल ही में कांग्रेस द्वारा किए गए सचिवालय घेराव का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है। गोदियाल के मुताबिक, सरकारी नौकरियां बेची जा रही हैं, पेपर लीक सिंडिकेट बेखौफ घूम रहे हैं और किसानों की जमीनों की अनैतिक नीलामी कराई जा रही है।
उन्होंने दो-टूक कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की जनता मौजूदा सरकार की हठधर्मिता और जनविरोधी नीतियों का जवाब पूर्ण बहुमत की कांग्रेस सरकार बनाकर देगी।
किन मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी?
कांग्रेस के इस ‘हल्ला बोल’ प्रदर्शन में राज्य से जुड़े कई स्थानीय और नीतिगत सवाल उठाए गए:
- भर्ती परीक्षाओं में धांधली और बेरोजगार युवाओं के साथ कथित छलावा।
- पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में महिला अपराध की बढ़ती घटनाएं।
- राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी नेतृत्व का राजनीतिक दुर्भावना से अपमान।
- किसानों पर आर्थिक दबाव और उनकी परिसंपत्तियों की जबरन नीलामी।
प्रदेश उपाध्यक्ष व मीडिया चेयरमैन राजीव महर्षि ने इसे सरकार की उल्टी गिनती की शुरुआत बताया। वहीं, दूसरी ओर पुलिस बल ने मुख्यमंत्री आवास से काफी पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोककर हिरासत में लिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात रखा।
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