देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच जिलों का नया बंटवारा कर दिया है। राजभवन की आधिकारिक मंजूरी के बाद कुल 11 कैबिनेट मंत्रियों को जिला नियोजन एवं अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष के साथ-साथ जिला प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सतपाल महाराज को हरिद्वार जिले का प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि साल 2027 में हरिद्वार में अर्धकुंभ का भव्य आयोजन होना है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू होनी है। महाराज के पास वर्तमान में लोक निर्माण, पर्यटन और सिंचाई जैसे भारी-भरकम विभाग पहले से ही मौजूद हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को दो महत्वपूर्ण पहाड़ी जिलों, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग का प्रभार मिला है। अगले महीने से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग जिला केंद्र में रहेगा, क्योंकि केदारनाथ धाम इसी जिले का हिस्सा है। कृषि और सैनिक कल्याण मंत्री होने के नाते जोशी पर यात्रा व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने का दोहरा दबाव होगा।
डॉ. धन सिंह रावत अब अल्मोड़ा जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में काम करेंगे। हालिया कैबिनेट फेरबदल में उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय लिया गया था, लेकिन शिक्षा और सहकारिता जैसे अहम विभागों के साथ अब वे अल्मोड़ा के विकास कार्यों की मॉनिटरिंग करेंगे।
राजधानी देहरादून की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को दी गई है। उनियाल, जिनके पास वन और चिकित्सा शिक्षा जैसे विभाग हैं, अब देहरादून जिला नियोजन समिति की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। वहीं, रेखा आर्या को नैनीताल से हटाकर अब सीमांत जिले पिथौरागढ़ का प्रभार सौंपा गया है।
नए मंत्रियों में भरत चौधरी को चमोली और चंपावत जैसे दो जिलों का जिम्मा मिला है। चमोली जिला बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। खजान दास को करीब डेढ़ दशक बाद कैबिनेट में वापसी के साथ नैनीताल जैसे प्रतिष्ठित जिले का प्रभारी बनाया गया है।
पौड़ी जैसे वीवीआईपी जिले की कमान मदन कौशिक को सौंपी गई है, जबकि ऊधम सिंह नगर की जिम्मेदारी प्रदीप बत्रा संभालेंगे। भीमताल के विधायक और पहली बार मंत्री बने राम सिंह कैड़ा को बागेश्वर जिले का प्रभार दिया गया है। सौरभ बहुगुणा को अब रुद्रप्रयाग के बजाय उत्तरकाशी जिले की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार प्रभार बांटते समय मंत्रियों के मौजूदा पोर्टफोलियो और आगामी चारधाम यात्रा व अर्धकुंभ की चुनौतियों का विशेष ध्यान रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि जिला स्तर पर रुकी हुई विकास योजनाओं को प्रभारी मंत्रियों के जरिए त्वरित गति से धरातल पर उतारा जा सके।









