AIMIM नेता अख्तरुल ईमान ने देहरादून में 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया। पार्टी सर्वे के आधार पर असदुद्दीन ओवैसी सीटों और गठबंधन पर अंतिम फैसला लेंगे।
देहरादून (11 अक्टूबर) : उत्तराखंड के चुनावी अखाड़े में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए औपचारिक तौर पर सियासी जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। बिहार में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अमौर से विधायक अख्तरुल ईमान के देहरादून दौरे से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
हालांकि ईमान ने इस यात्रा को शुरुआत में निजी बताया, लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नैयर काज़मी और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी उत्तराखंड में संगठन को मजबूत कर चुनाव मैदान में उतरेगी। पार्टी सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी जमीनी सर्वे के बाद सीटों और गठबंधन पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
उत्तराखंड में 2027 चुनाव की तैयारी में AIMIM
देहरादून में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अख्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार में जिस तरह पार्टी सियासी आंधी और अंधेरे के बीच हक-इंसाफ का चिराग जला रही है, ठीक उसी तरह उत्तराखंड में भी जुल्म और ज्यादतियों के खिलाफ यह मशाल जलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी सीटों की संख्या तय करना जल्दबाजी होगी।
पार्टी चुनाव और आधिकारिक अधिसूचना से पहले राज्य की विभिन्न विधानसभाओं में जमीनी स्तर पर सर्वे कराएगी। कार्यकर्ताओं के फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ओवैसी तय करेंगे कि कितनी सीटों पर प्रत्याशी उतारे जाएं। ईमान ने यह भी साफ किया कि पार्टी न्याय, भाईचारे और कमजोर वर्गों के अधिकारों की बात करने वाले समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के विकल्प पर भी विचार करेगी।
मुस्लिम पार्टी के ठप्पे पर दिया तीखा जवाब
पार्टी पर सिर्फ एक वर्ग विशेष की राजनीति करने के आरोपों पर पलटवार करते हुए ईमान ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “अगर किसी गाड़ी का ड्राइवर मुसलमान है, तो इसका यह मतलब नहीं निकल जाता कि उसमें बैठे सभी मुसाफिर मुसलमान हैं। हमारा देश संविधान से चलता है और संविधान हर नागरिक को बराबरी का हक देता है।” उन्होंने कहा कि AIMIM एक संवैधानिक पार्टी है और हर मजलूम के साथ खड़ी है। उन्होंने आगे जोड़ा, “हम मुसलमानों के मुद्दों पर इसलिए मुखर रहते हैं क्योंकि सबसे ज्यादा जुल्म उन पर हो रहा है। जिस मोहल्ले में आग लगती है, पहले उसी मोहल्ले की बात की जाती है। हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं; अगर मस्जिद बचाते हुए जान दे सकते हैं, तो मंदिर पर हमला होने पर भी उसकी हिफाजत में सबसे आगे खड़े होंगे।”
तराई और मैदानी सीटों पर बदलेगा सियासी समीकरण
उत्तराखंड की राजनीति पारंपरिक रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच दोध्रुवीय रही है। ऐसे में मैदानी जिलों—खासकर हरिद्वार, उधम सिंह नगर और देहरादून की मुस्लिम व दलित बहुल सीटों पर AIMIM की सक्रियता सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को दे सकती है। राज्य में बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और शिक्षा के गिरते स्तर का मुद्दा उठाते हुए ईमान ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सत्ता के नशे में चूर हुक्मरान बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।
आने वाले महीनों में पार्टी संगठन के विस्तार और सर्वे की प्रक्रिया तेज करेगी, जिससे साफ होगा कि तराई और मैदानी बेल्ट में ओवैसी की पार्टी किन समीकरणों के साथ मैदान में उतरती है।









