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मसूरी में अक्षय तो नैनीताल में जाह्नवी, बड़े प्रोजेक्ट्स से गुलजार हुआ उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड में अक्षय कुमार और जाह्नवी कपूर के प्रोजेक्ट्स से पर्यटन और रोजगार को रफ्तार मिली है। 7 दिन की सिंगल विंडो परमिशन ने बढ़ाई फिल्म मेकर्स की दिलचस्पी।

देहरादून (17 अक्टूबर) : मसूरी की वादियों में अक्षय कुमार और नैनीताल की झीलों के किनारे जाह्नवी कपूर के बड़े प्रोजेक्ट्स की शूटिंग के साथ ही उत्तराखण्ड की जमीनी आर्थिकी को बड़ा सहारा मिला है। सरकारी दावों से इतर जमीनी हकीकत यह है कि इन हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट्स के पहुंचने से पहाड़ों में होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय लाइन प्रोडक्शन से जुड़े सैकड़ों युवाओं के लिए सीधी कमाई के रास्ते खुल गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया है कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ वादियों को पर्दे पर दिखाना नहीं, बल्कि फिल्म पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना है।

बड़े सितारों के प्रोजेक्ट्स से स्थानीय रोजगार में उछाल

मसूरी, लैंढौर और नैनीताल जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में इन दिनों बॉलीवुड की नामी यूनिट्स डेरा डाले हुए हैं। इससे ऑफ-सीजन में भी स्थानीय होटल व्यवसायियों, टैक्सी ऑपरेटरों, कैटरिंग सेवाओं और स्थानीय कलाकारों को सीधा काम मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, जब कोई बड़ा प्रोडक्शन हाउस राज्य में आता है तो निचले स्तर पर काम करने वाले स्पॉट बॉय से लेकर स्थानीय तकनीशियनों तक को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाहर से आने वाले क्रू में न्यूनतम स्थानीय श्रम और प्रतिभा की भागीदारी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित हो, जिससे युवाओं का पलायन भी थमे।

सात दिनों में परमिशन और सिंगल विंडो की हकीकत

शूटिंग के लिए पहले फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिसे खत्म करने के लिए ‘उत्तराखण्ड फिल्म नीति 2024’ को पूरी तरह सक्रिय किया गया है। अब राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम के तहत आवेदन करने के ठीक सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से शूटिंग की मंजूरी दी जा रही है।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद (UFDC) को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो वन विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय नगर निकायों से क्लीयरेंस दिलवाने की जिम्मेदारी खुद संभालती है। नियमों में यह सरलीकरण ही बड़े फिल्ममेकर्स को कश्मीर या हिमाचल के मुकाबले उत्तराखण्ड की ओर खींच रहा है।

फिल्म पर्यटन से बदलेगा पूरे पहाड़ी क्षेत्र का ढांचा

राज्य सरकार अब इन शूटिंग लोकेशंस को स्थायी टूरिज्म सर्किट के रूप में भुनाने की तैयारी में है। प्रशासनिक स्तर पर निर्देश दिए गए हैं कि जिन ग्रामीण या अछूते इलाकों में शूटिंग हो रही है, वहां बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाकर राज्य सरकार राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन हाउस को भी आकर्षित करने का खाका खींच चुकी है।

स्थानीय स्तर पर गाइड, जूनियर आर्टिस्ट और तकनीकी सहयोगियों की एक पूरी फौज तैयार की जा रही है, ताकि आने वाले समय में बाहरी यूनिट्स को स्थानीय मैनपावर पर निर्भर होना पड़े और राजस्व सीधे पहाड़ों में रुके।

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