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उत्तराखंड में सरकारी जमीनों की बिक्री का आरोप खारिज, प्रमुख सचिव ने सामने आकर दिया जवाब

उत्तराखंड सरकार ने यूआईआईडीबी की जमीनों की बिक्री के आरोपों को खारिज किया। प्रमुख सचिव ने कहा कि सिर्फ 6-7 भूखंडों की बिडिंग होगी।

देहरादून, 04 नवंबर : उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के तहत सरकारी जमीनों के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों और राजनीतिक बहस पर प्रदेश सरकार ने अपना रुख साफ किया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी सरकारी जमीन की मनमानी बिक्री नहीं कर रही है, बल्कि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण (एसेट मॉनेटाइजेशन) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के जरिए आर्थिक गतिविधियों को विस्तार दे रही है। आगामी दो से तीन महीनों के भीतर केवल 6 से 7 चयनित सरकारी भूखंडों की बिडिंग प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।

23 हजार रोजगार और 300 करोड़ का मासिक राजस्व

प्रमुख सचिव ने बताया कि उत्तराखंड में पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, उद्योग और वेलनेस के क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रस्तावित हॉस्पिटैलिटी निवेश से राज्य में लगभग 7 से 8 हजार प्रत्यक्ष और 10 से 15 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसके साथ ही जीएसटी और अन्य कर माध्यमों से राज्य के खजाने में हर महीने करीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व जुड़ने की उम्मीद है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य होटल प्रबंधन और पर्यटन में प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को अपने ही गृह राज्य में रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें काम की तलाश में अन्य राज्यों या विदेशों का रुख न करना पड़े। इसके दायरे में स्थानीय किसान, टैक्सी चालक, फल-सब्जी उत्पादक और होमस्टे संचालक भी शामिल होंगे।

चौबटिया, धनोल्टी और आईडीपीएल की जमीनें योजना से बाहर

विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि जिन स्थानों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, उनमें से अधिकांश का वर्तमान योजना से कोई संबंध नहीं है। रानीखेत के चौबटिया स्थित भूमि की उपयोगिता का परीक्षण किया गया था, लेकिन उपयुक्त संभावनाएं न दिखने पर उसे पहले ही प्रस्ताव से हटा दिया गया था। वहीं धनोल्टी की भूमि वन क्षेत्र के अंतर्गत आने के कारण प्रस्ताव से बाहर की जा चुकी है।

इसके अलावा ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल परिसर भी वन भूमि है और अभी राज्य सरकार को विधिवत हस्तांतरित नहीं हुआ है। रानीबाग और सितारगंज स्थित एचएमटी की भूमि सिडकुल के अधिकार क्षेत्र में है, जिसका यूआईआईडीबी की मौजूदा प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। पीडब्ल्यूडी के जिन डाक बंगलों को लेकर चर्चाएं की जा रही हैं, उनके संबंध में न तो कैबिनेट की मंजूरी मिली है और न ही बोर्ड ने कोई अनुमोदन दिया है।

सरकारी परिसंपत्तियों का उत्पादक उपयोग

सरकार के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और राजस्व बढ़ाने के लिए सरकारी भूमि का उत्पादक उपयोग अनिवार्य है। प्रमुख सचिव ने दोहराया कि आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से मिलने वाला राजस्व अंततः सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल नेटवर्क और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर अपुष्ट सूचनाओं के बजाय वास्तविक तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर चर्चा करने की बात कही है।

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