अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ अफसरों से की मुलाकात। जांच एजेंसी ने सभी बिंदुओं की निष्पक्ष पड़ताल का भरोसा दिया।
नई दिल्ली (16 अक्टूबर) : उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण में इंसाफ की गुहार लेकर दिवंगत युवती के माता-पिता शुक्रवार को देश की राजधानी दिल्ली स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मुख्यालय पहुंचे। पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बंद कमरे में अहम बैठक की और अब तक अनसुलझे रहे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी अधिकारियों को सौंपी।
इस मुलाकात के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने परिजनों को आधिकारिक रूप से आश्वस्त किया है कि प्रकरण के सभी पहलुओं का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा और विवेचना को पूरी तरह निष्पक्ष एवं न्यायसंगत ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। पहाड़ से लेकर राजधानी तक चर्चा में रहे इस मामले में परिजनों की सीधी दिल्ली दस्तक से जांच में नए मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं।
सीबीआई मुख्यालय पहुंचे परिजनों ने उठाए कई अनसुलझे सवाल
सीबीआई मुख्यालय में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को कानूनी नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित एजेंसी के मुख्यालय पहुंचे वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने जांच अधिकारियों के सामने वह तमाम सवाल रखे, जिन्हें लेकर उत्तराखंड की जनता और परिजन लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं।
परिजनों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में कई ऐसी कड़ियां हैं जिनकी अब तक मुकम्मल छानबीन नहीं हो सकी है। सीबीआई के सूचना अनुभाग द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अधिकारियों ने परिजनों की बात को गंभीरता से दर्ज किया। एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रकरण से जुड़े प्रत्येक बिंदु का समुचित परीक्षण किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कानूनी खामी या संदेह बाकी न रहे।
रिजॉर्ट ध्वस्तीकरण से लेकर वीआईपी एंगल तक उठा विवाद
ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या का यह मामला सितंबर 2022 से ही लगातार सुर्खियों में रहा है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके साथियों को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हालांकि, शुरुआत से ही उस कथित ‘वीआईपी’ गेस्ट की भूमिका पर सवाल उठते रहे, जिसे ‘अतिरिक्त सेवाएं’ देने का दबाव बनाने का आरोप सामने आया था।
इसके अलावा, घटना के ठीक बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा आनन-फानन में की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी भारी विवाद हुआ था। परिजनों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया था कि कमरों को तोड़कर महत्वपूर्ण डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को कथित रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। परिजनों का मानना है कि इन सवालों की तह तक पहुंचे बिना न्याय अधूरा रहेगा।
सीबीआई की निष्पक्ष विवेचना से जगी नई उम्मीद
सीबीआई की ओर से मिले आधिकारिक आश्वासन के बाद अब उत्तराखंड के जनमानस और पीड़ित परिवार में न्याय की उम्मीद फिर से जगी है। कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि सीबीआई परिजनों द्वारा सौंपे गए नए बिंदुओं और कथित वीआईपी एंगल को अपनी जांच के दायरे में शामिल करती है, तो मामले की कानूनी दिशा में बड़ा मोड़ आ सकता है।
केंद्रीय एजेंसी अब तक जुटाए गए फॉरेंसिक साक्ष्यों, बयानों और केस डायरी का दोबारा तकनीकी परीक्षण कर सकती है। स्थानीय पौड़ी गढ़वाल से लेकर देहरादून तक निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय एजेंसी की जांच कब तक धरातल पर उतरेगी और वर्षों से अनसुलझे सवालों का पर्दाफाश कब होगा।









