अंकिता भंडारी केस में कथित वीआईपी विवाद के बीच दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून में विशाल कैंडल मार्च निकाला।
देहरादून (17 अक्टूबर) : अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘कथित वीआईपी’ के नाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व भाजपा प्रभारी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर उत्तराखंड की सियासत में भूचाल आ गया है। मामले की सीबीआई जांच जारी रहने के दौरान केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में शनिवार को उत्तराखंड कांग्रेस ने राजधानी देहरादून में जोरदार कैंडल मार्च निकाला। पार्टी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है।
नियुक्ति रद्द करने की मांग पर फूटा गुस्सा
कांग्रेस भवन से शुरू हुआ यह विशाल कैंडल मार्च ऐतिहासिक घंटाघर होते हुए वापस पार्टी मुख्यालय तक पहुंचा। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में आयोजित इस मार्च में हजारों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ तीखी नारेबाजी करते हुए “अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं” और “दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करो” के नारे लगाए। मार्च में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत समेत पार्टी के कई शीर्ष नेता पहली पंक्ति में मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जांच पूरी होने से पहले संवैधानिक पद सौंपना मामले को प्रभावित करने का प्रयास है।
कथित वीआईपी एंगल और दिल्ली हाईकोर्ट की रोक
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में ऋषिकेश के वनंत्रा रिजॉर्ट की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया गया था। रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य समेत तीन मुख्य आरोपियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। हालांकि, रिजॉर्ट में आने वाले एक ‘अज्ञात वीआईपी’ को लेकर विवाद लगातार बना रहा, जिसकी जांच जनवरी 2026 में सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी।
इस दौरान वायरल ऑडियो और वीडियो में दुष्यंत गौतम का नाम कथित तौर पर घसीटे जाने के बाद उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मानहानि मानते हुए उनके खिलाफ मानहानिकारक सामग्री के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, 12 अक्टूबर को उनकी राज्यपाल पद पर नियुक्ति की घोषणा के बाद से मृतका के परिजन और विपक्षी दल मुखर हो गए हैं।
शपथ ग्रहण से पहले आर-पार की कानूनी लड़ाई
दुष्यंत गौतम 19 अक्टूबर को गंगटोक स्थित राजभवन में सिक्किम के राज्यपाल पद की शपथ लेने वाले हैं। इससे ठीक पहले मृतका के माता-पिता द्वारा दिल्ली के इंडिया गेट पर दिए गए धरने और अब देहरादून में कांग्रेस के सड़क पर उतरने से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस का स्पष्ट रुख है कि अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण से पहले इस मामले के ‘वीआईपी’ एंगल की जांच निष्पक्ष रूप से मुकाम तक पहुंचाई जानी चाहिए। पार्टी ने दो टूक चेतावनी दी है कि अंकिता को न्याय मिलने और सवालों के तार्किक जवाब सामने आने तक यह संघर्ष सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगा।









