उत्तराखण्ड शासन ने वित्त सेवा के 6 वरिष्ठ अफसरों को लेवल-13 चयन वेतनमान पर पदोन्नत किया है। सभी को 2 साल की परिवीक्षा अवधि में मूल तैनाती पर ही रहना होगा।
देहरादून (23 अक्टूबर) : उत्तराखण्ड शासन ने वित्त सेवा संवर्ग में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए ज्येष्ठ वेतनमान श्रेणी-एक के छह वरिष्ठ अधिकारियों को लेवल-13 (चयन वेतनमान) में पदोन्नति दे दी है। राज्यपाल की औपचारिक संस्तुति के बाद वित्त अनुभाग-6 ने इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया। पदोन्नति पाने वाले सभी अधिकारी तत्काल प्रभाव से पदोन्नत पद पर कार्यभार ग्रहण करेंगे, हालांकि शासन ने साफ किया है कि अलग से ट्रांसफर सूची आने तक सभी अधिकारी अपने मौजूदा दफ्तरों में ही मूल दायित्व संभालते रहेंगे।
बिना तबादले मूल तैनाती पर ही संभालेंगे पदभार
शासनादेश की शर्तों के अनुसार पदोन्नत किए गए सभी छह अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 02 वर्ष की परिवीक्षावधि (प्रोबेशन) पर रखा गया है। शासन ने यह स्पष्ट नीति अपनाई है कि पदोन्नति के तुरंत बाद किसी भी अधिकारी की तैनाती में अचानक फेरबदल नहीं किया जाएगा। जब तक नए तैनाती आदेश अलग से निर्गत नहीं होते, तब तक सभी अधिकारी अपने वर्तमान कार्यस्थलों पर ही पदोन्नत पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे और अपने मूल व अतिरिक्त प्रभारों का निर्वहन पूर्ववत जारी रखेंगे।
छह अफसरों की सूची और नया वेतनमान ढांचा
विभागीय चयन समिति (DPC) की संस्तुति पर जारी सूची में डॉ. पंकज कुमार शुक्ल, पूजा नेगी, नीतू भण्डारी, शशि सिंह, आनन्द सिंह और वीरेन्द्र रावत शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों को पूर्व वेतनमान (₹15,600–39,100, ग्रेड पे ₹7,600) से उच्चीकृत करते हुए चयन वेतनमान (₹37,400–67,000, ग्रेड पे ₹8,700, पुनरीक्षित वेतनमान ₹1,23,100–2,15,900, लेवल-13) स्वीकृत किया गया है। उप सचिव सुनील कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में सभी अधिकारियों को पदभार ग्रहण करने की सूचना तत्काल शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वेतन आहरण और बजट समायोजन का स्पष्ट फॉर्मूला
शासन ने अधिकारियों के वेतन आहरण को लेकर किसी भी वित्तीय उलझन से बचने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। निदेशक (कोषागार, पेंशन एवं हकदारी) को सभी कोषागारों और विभागाध्यक्षों से समन्वय बनाकर वेतन आहरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो अधिकारी राज्य सरकार से इतर स्वायत्तशासी निकायों या विश्वविद्यालयों में प्रतिनियुक्ति अथवा मूल प्रभार के रूप में तैनात हैं, उनके पदोन्नत पद का वेतन भी संबंधित संस्थाओं से ही आहरित होगा। आदेश की प्रतियां महालेखाकार, समस्त जिलाधिकारियों और कोषाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।









