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क्या उत्तराखंड में कट रहे वैध मतदाताओं के नाम? सचिवालय स्थित निर्वाचन दफ्तर पर जोरदार हंगामा

दून हॉराइज़न, देहरादून (26 सितम्बर) : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में चुनावी पारदर्शिता और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को लेकर सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शुक्रवार को पार्टी के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) के दफ्तर का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) अभियान की आड़ में सुनियोजित तरीके से वैध मतदाताओं के नाम छांटे जा रहे हैं।

कांग्रेस भवन से शुरू हुआ यह पैदल मार्च सचिवालय की ओर बढ़ा, जहां बैरिकेडिंग पर पुलिस के साथ तीखी धक्का-मुक्की देखने को मिली। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चौराहे पर उनका पुतला दहन किया।

फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर खड़ा हुआ तीखा विवाद

प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ‘फॉर्म-7’ बना। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में सुनियोजित साजिश चल रही है। ऐसे लोग थोक के भाव फॉर्म-7 जमा कर रहे हैं, जो संबंधित मतदाता के न तो पड़ोसी हैं और न ही उस इलाके के मूल निवासी।

पार्टी का कहना है कि जब तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन न कर लें और संबंधित नागरिक को अपना पक्ष रखने का लिखित नोटिस न मिले, तब तक किसी का भी नाम मतदाता सूची से कतई नहीं काटा जाना चाहिए। असामान्य संख्या में आपत्ति दर्ज कराने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की सूची तत्काल सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई।

आयोग की निष्पक्षता पर सवाल, राष्ट्रपति से दखल की अपील

विपक्ष की ओर से उपजिलाधिकारी (SDM) सदर के जरिए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 9 सूत्रीय ज्ञापन भेजा गया। इस ज्ञापन में चुनाव आयोग की साख और स्वायत्तता पर गंभीर चिंता जताई गई है। कांग्रेस ने दावा किया कि आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति को दरकिनार कर एकतरफा फैसले थोपे जा रहे हैं, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों को तत्काल पद से हटाकर उनकी कार्यप्रणाली की न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही विधानसभा व पोलिंग बूथ स्तर पर आए सभी फॉर्म-7 आवेदनों का ब्यौरा पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम जनता को पता चल सके कि किसके इशारे पर आपत्तियां डाली गईं।

सड़क पर उतरे तमाम दिग्गज, एकजुट दिखा संगठन

इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व एकजुट नजर आया। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल अग्रिम पंक्ति में डटे रहे। इसके अलावा ममता राकेश, लखपत बुटोला और रवि बहादुर समेत पार्टी के कई वर्तमान विधायकों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

फिलहाल कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मतदाता सूचियों में पक्षपातपूर्ण हेरफेर बंद नहीं हुआ और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बहाल नहीं की गई, तो यह आंदोलन देहरादून की सड़कों से निकलकर प्रदेश के हर ब्लॉक और तहसील स्तर तक पहुंचेगा।

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