दून हॉराइज़न, देहरादून (05 सितंबर): जिले में चुनावी विश्वसनीयता और प्रशासनिक सतर्कता को परखने के लिए शनिवार को जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया। जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम डॉ. आशीष चौहान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर सीधे ईवीएम वेयरहाउस पहुंचे।
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मकसद साफ था—ईवीएम (Electronic Voting Machine) और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर पारदर्शी बनाए रखना। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोटिंग मशीनों की हिफाजत केवल कमरों में ताला जड़ने भर तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया काम करती है।
सुरक्षा का कड़ा पहरा और डबल लॉक सिस्टम की जांच
वेयरहाउस के भीतर पहुंचते ही जिलाधिकारी ने सुरक्षा घेरे, तैनात पहरेदारों के रोस्टर और चौबीसों घंटे चलने वाले सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का जायजा लिया। दरअसल, केंद्रीय निर्वाचन आयोग की नियमावली के मुताबिक वेयरहाउस केवल अधिकृत अधिकारियों और मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही खोला जा सकता है।
डीएम ने वहां रखे सुरक्षा लॉग-बुक, आगंतुक पंजिका और इन-आउट टाइमिंग के रिकॉर्ड को खुद पलटकर देखा। मौके पर मौजूद अधिकारियों को हिदायत दी गई कि किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति की आवाजाही परिसर के आसपास कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
पारदर्शिता पर जोर, राजनीतिक प्रतिनिधियों को दी गई पूरी जानकारी
प्रशासनिक टीम ने निरीक्षण के दौरान बीजेपी नेता दौलतराम मकवाना और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि कमल राणा सहित अन्य नेताओं को सुरक्षा लेयर्स के बारे में विस्तार से समझाया। वेयरहाउस की सीलिंग, सुरक्षा कक्षों की नमी रहित स्थिति और मशीनों को धूल-धक्कड़ से बचाने के इंतजामों पर चर्चा हुई।
डॉ. चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि चुनावी प्रक्रिया की साख जनता के भरोसे पर टिकी होती है। अगर मशीनों के रख-रखाव में तय एसओपी का पालन नहीं होगा, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए समय-समय पर ऐसे संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य रूप से जारी रहेंगे।
प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद
इस संयुक्त मुआयने के दौरान मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह, ईवीएम के नोडल अधिकारी दिनक रौतेला, तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव तथा सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने वेयरहाउस परिसर में अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन बिजली बैकअप और आपात निकास द्वारों की तकनीकी स्थिति की भी समीक्षा की।
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