देहरादून, 25 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Ayushman Card Update : राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने केंद्र की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राज्य की अटल आयुष्मान योजना से जुड़े सभी अस्पतालों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करना अनिवार्य कर दिया है। मानकों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों को योजना से सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रीना जोशी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस नए फरमान के तहत सभी संबद्ध अस्पतालों को आगामी 31 अगस्त तक हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) को अपने यहाँ पूरी तरह चालू करना होगा।
लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर एक सितंबर से गाज गिरनी तय है। जो भी अस्पताल तय समय सीमा के भीतर मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराएगा, उसे एक सितंबर से योजना के तहत मरीजों के इलाज की सुविधा देने से रोक दिया जाएगा।
प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर भी प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है। एक सितंबर के बाद केवल उन्हीं सरकारी और निजी अस्पतालों को क्लेम और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी जो नियमों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे।
स्कैन एंड शेयर सुविधा होगी अनिवार्य
अस्पतालों को अब अपने पूरे ढांचे को डिजिटल मिशन के अनुरूप ढालना होगा। हर संस्थान में हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम के साथ-साथ स्कैन एंड शेयर सुविधा को भी अनिवार्य रूप से लागू करना पड़ेगा।
चिकित्सीय स्टाफ का भी पूरा ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और फार्मासिस्टों की अपनी विशिष्ट हेल्थ प्रोफेशनल आईडी होनी चाहिए। इसके साथ ही अस्पतालों के लिए हेल्थ फैसिलिटी आईडी बनाना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
सभी मरीजों के उपचार और बीमारी से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन इकोसिस्टम से लिंक करना होगा। इस प्रक्रिया से मरीजों का डेटा सुरक्षित रहेगा और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर होने पर डॉक्टर उनके पुराने इलाज की हिस्ट्री को ऑनलाइन देख सकेंगे।
पचास लाख मरीजों पर सीधा असर
उत्तराखंड में मौजूदा समय में 50 लाख से अधिक लोगों के पास आयुष्मान कार्ड की सुविधा मौजूद है। इस बड़ी आबादी के मुफ्त इलाज के लिए राज्य भर के लगभग 120 सरकारी और प्राइवेट अस्पताल इस योजना के पैनल में शामिल हैं।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज की गारंटी मिलती है। किसी भी बड़े अस्पताल के पैनल से हटने की स्थिति में मरीजों को सीधे तौर पर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन इस डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था को कड़ाई से लागू करा रहा है।








