---Advertisement---

सालों से अटकी भर्तियों से हटी रोक, अब बिना हाईकोर्ट गए सीधे स्कूलों में होगी तैनाती

उत्तराखंड सरकार ने अशासकीय माध्यमिक स्कूलों में भर्ती से रोक हटा दी है। अब छात्र संख्या और बहाल पदों के आधार पर पारदर्शी तरीके से शिक्षक व कर्मी नियुक्त होंगे।

देहरादून (25 अक्टूबर) : उत्तराखंड के सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक राज्य सरकार ने हटा दी है। चुनावी वर्ष की राजनीतिक सुगबुगाहट के बीच शासन ने यह कदम उठाया है, जिससे वर्षों से कानूनी दांवपेच और स्टाफ की कमी से जूझ रहे अशासकीय विद्यालयों में नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के ताजा आदेश के बाद अब विद्यालय प्रबंधन समितियां अपने स्तर पर खाली पदों को भर सकेंगी, लेकिन इस बार भर्ती प्रक्रिया को छात्र संख्या और जीवित पदों की कड़ी शर्तों से बांध दिया गया है।

चुनावी साल में अशासकीय स्कूलों से रोक हटी

प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों के चलते पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और स्कूलों में जरूरी स्टाफ तैनात करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया शासनादेशों के तहत पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। चुनावी साल में सरकार के इस फैसले से जहां प्रबंधन तंत्र को राहत मिली है, वहीं प्रदेश के हजारों योग्य बेरोजगार अभ्यर्थियों के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुले हैं।

हाईकोर्ट के मुकदमों और रसूखदार प्रबंधनों पर लगाम

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच मुकदमों और प्रबंधनों के रसूख का था। शिक्षा मंत्री ने माना कि लंबे समय से रोक लगे होने के कारण कई साधन संपन्न प्रबंधन समितियां भर्तियों की अनुमति के लिए सीधे नैनीताल हाईकोर्ट की शरण ले रही थीं और वहां से राहत लेकर नियुक्तियां कर रही थीं। दूसरी तरफ, दूरदराज और बिना रसूख वाले विद्यालय शिक्षकों की भारी कमी से जूझते रहे। सरकार के इस एकतरफा फैसले से मुकदमों की बाढ़ पर लगाम लगेगी और सभी अशासकीय स्कूलों को बराबरी के आधार पर शिक्षक और कर्मचारी मिल सकेंगे।

छात्र संख्या के कड़े मानकों पर होगी भर्ती

प्रबंधनों की मनमानी रोकने के लिए विभाग ने सख्त फिल्टर लगाए हैं। नई व्यवस्था के तहत अंधाधुंध नियुक्तियां नहीं होंगी, बल्कि भर्ती केवल उन्हीं पदों पर की जाएगी जिन्हें शासन के सक्षम स्तर से विधिवत बहाल या पुनर्जीवित किया गया हो। इसके साथ ही विद्यालय में दर्ज वास्तविक छात्र संख्या को प्राथमिक पैमाना बनाया गया है।

जिस विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या मानकों के अनुरूप होगी, वहीं नए पदों पर चयन की अनुमति मिलेगी। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को चेताया है कि नियमों की अनदेखी पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment