---Advertisement---

किच्छा स्ट्रांग रूम विवाद पर बंसीधर भगत का कांग्रेस पर तीखा वार, बोले-कानून से ऊपर कोई नहीं

---Advertisement---

दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : उधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) के किच्छा में स्ट्रांग रूम के बाहर उपजे गतिरोध और हल्द्वानी में प्रशासनिक अधिकारियों से तनातनी को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में तल्खी बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंसीधर भगत ने कांग्रेस पर सीधा प्रहार करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक विरोध के बहाने सरकारी तंत्र पर दबाव बनाना और चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता।

स्ट्रांग रूम पर सवाल और प्रशासन से टकराव

किच्छा में मतपेटियों की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और उनके समर्थकों द्वारा दिए गए धरने को भाजपा ने नियमों के खिलाफ बताया। बंसीधर भगत ने कहा कि अगर स्ट्रांग रूम के पर्दों या व्यवस्था से जुड़ी कोई भी वास्तविक तकनीकी शिकायत थी, तो अधिकृत प्रक्रिया के तहत निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष सीसीटीवी फुटेज और ठोस साक्ष्य रखकर बात रखी जा सकती थी। बिना किसी प्रमाण के मतपेटी बदलने की बातें फैलाना जनता में भ्रम पैदा करने की कोशिश है। नियमों के मुताबिक स्ट्रांग रूम प्रोटोकॉल (Election Strong Room Protocol) पूरी तरह पारदर्शी होता है और उसकी निगरानी केंद्रीय व स्थानीय दोनों स्तरों पर तय मानकों के तहत की जाती है।

पुराने विवादों का जिक्र और दोहरे मापदंड का आरोप

सियासी बयानबाजी यहीं नहीं रुकी। भाजपा नेता ने कांग्रेस के आंतरिक रुख पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2011 के रामलीला मैदान विवाद का जिक्र छेड़ा। उनका कहना था कि आक्रामक बर्ताव से जुड़े मामले नए नहीं हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती घटनाक्रमों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जब कांग्रेस के अपने प्रतिनिधि विवादों में घिरते हैं, तब संगठन चुप्पी साध लेता है, लेकिन वही दल हर प्रशासनिक कार्रवाई पर सड़क से लेकर विधानसभा तक हंगामा खड़ा करने लगता है।

हल्द्वानी घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया

हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों के बीच एसएसपी कार्यालय परिसर में जो गहमागहमी और नोकझोंक हुई, उसे भगत ने राजनीतिक हताशा का परिणाम करार दिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल जैसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद खाकी पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।

पुलिस और प्रशासनिक तंत्र कानून-व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए काम करता है, उनसे टकराव मोल लेकर राजनीतिक जमीन हासिल करने की रणनीति लंबे समय तक नहीं टिक सकती।

बंसीधर भगत ने यह भी रेखांकित किया कि निष्पक्ष जांच से किसी को छूट नहीं है—यदि भाजपा का भी कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ भी निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया ही लागू होगी।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment