उत्तराखंड सरकार ने अनुपूरक बजट में धान-गेहूं खरीद के लिए 1,100 करोड़ मंजूर किए हैं। बारानी खेती, मौन और मत्स्य पालन योजनाओं को भी मिली बड़ी वित्तीय मदद।
देहरादून (27 अक्टूबर) : उत्तराखंड की धामी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए बड़ा वित्तीय बंदोबस्त किया है। पारंपरिक बजट आवंटनों से आगे बढ़ते हुए सरकार ने इस बार केवल मैदानी क्षेत्रों की मुख्य फसलों तक सीमित न रहकर पर्वतीय खेती की भौगोलिक विषमताओं और जलवायु संकट को मुख्य एजेंडे में शामिल किया है।
अनुपूरक बजट में अन्नपूर्ति योजना के अंतर्गत धान और गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर निर्बाध खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि तय की गई है, जिससे किसानों के खातों में भुगतान बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके साथ ही सुदूर पर्वतीय ढलानों पर बिना सिंचाई के होने वाली खेती को बचाने के लिए विशेष जलवायु अनुकूल बारानी कृषि योजना का रास्ता साफ किया गया है।
बारानी कृषि और मौन पालन से बदलेगी तस्वीर
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में खेती का बड़ा हिस्सा पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन के चलते बेमौसम बारिश और सूखे की मार झेल रहे किसानों को सहारा देने के लिए सरकार ने उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (जायका) के लिए 70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
इसका सीधा मकसद पहाड़ी ढलानों पर पानी के प्राकृतिक स्रोतों को सहेजना और कम पानी में तैयार होने वाले मोटे अनाजों (मिलेट्स) व पारंपरिक फसलों की पैदावार बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त, ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में बहने वाली नदियों के पानी का लाभ उठाने के लिए ट्राउट प्रोत्साहन योजना को लगभग 28 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं, नई मौन पालन नीति के अमल के लिए एक करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, ताकि जंगली जानवरों के आतंक से जूझ रहे काश्तकार वैकल्पिक आजीविका अपना सकें।
फसल खरीद का पुराना संकट और वित्तीय समाधान
राज्य में रबी और खरीफ विपणन सत्रों के दौरान अक्सर सरकारी खरीद केंद्रों पर अन्नदाताओं को बजट की कमी के चलते भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कई मौकों पर आढ़तियों और बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल बेचने की मजबूरी सामने आती रही है। शासन स्तर पर 1,100 करोड़ रुपये का सुरक्षित रिवॉल्विंग फंड तय होने से अब खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग को समय पर उठान और डीबीटी ट्रांसफर में दिक्कत नहीं आएगी।
इसके समानांतर, छोटे स्तर पर काम कर रहे किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) में 35 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इससे स्थानीय सेब, माल्टा, बुरांश और दालों के स्थानीय प्रसंस्करण और पैकेजिंग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
सहकारिता ऋण से लेकर किसान पेंशन तक राहत
राज्य मंत्रिमंडल और विधानसभा से पास इस वित्तीय प्रावधान में सामाजिक सुरक्षा और जीरो-इंटरेस्ट लोन मॉडल को भी मजबूती दी गई है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत ब्याज मुक्त फसली ऋण की निरंतरता बनाए रखने के लिए 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वहीं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और साधनहीन काश्तकारों को सामाजिक सुरक्षा कवच देने वाली किसान पेंशन योजना के लिए 9 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, राज्य भर में निराश्रित गोवंश के प्रबंधन और फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए विभिन्न जनपदों में आधुनिक गौ सदनों के निर्माण हेतु लगभग 9 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन सभी मदों से जारी धनराशि का उपयोग इसी वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए किया जाएगा।









