दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : तीन तलाक और निकाह हलाला की मार झेलकर बेघर होने वाली मुस्लिम महिलाओं के सिर पर अब पक्की छत देने की तैयारी चल रही है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) ने अपनी खाली पड़ी जमीनों पर ऐसी बेसहारा महिलाओं के लिए मुफ्त आवास मुहैया कराने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है।
बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार, इस संवेदनशील मसले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शुरुआती दौर की बातचीत हो चुकी है और अब इसे औपचारिक मंजूरी के लिए आगामी बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल किया जा रहा है।
वक्फ की खाली जमीनों पर बनेगा सुरक्षित आशियाना
कागजों में दर्ज हजारों बीघा संपत्ति अब तक या तो विवादों में उलझी रही या अतिक्रमण का शिकार हुई, लेकिन अब इसे सीधे जरूरतमंदों के पुनर्वास से जोड़ने की तैयारी है। शम्स का तर्क है कि वक्फ की संपत्तियों पर समाज की बेसहारा और जरूरतमंद महिलाओं का पहला हक बनता है। बोर्ड अपने मौजूदा ‘लैंड बैंक’ का आकलन कर रहा है, जहां इन मकानों का निर्माण कराया जा सके।
परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकारी निर्माण एजेंसियों अथवा निजी डेवलपर्स के साथ पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर काम करने के विकल्पों को तलाशा जा रहा है। मकानों की कुल संख्या, निर्माण का बजट और आवंटित होने वाले फ्लैट्स का आकार बोर्ड की औपचारिक बैठक के बाद ही तय होगा।
नाममात्र का मेहर और आर्थिक बेबसी बनी बड़ी वजह
फैसले की पृष्ठभूमि समझाते हुए बोर्ड चेयरमैन ने मुस्लिम समाज के भीतर तलाक के बाद महिलाओं की दयनीय आर्थिक स्थिति का हवाला दिया। असल में, कई निकाहों में मेहर की रकम आज भी महज 500 से 5,000 रुपये के बीच तय होती है। तलाक के बाद जब महिला पर बच्चों की परवरिश का पूरा जिम्मा आ जाता है, तो इतनी मामूली रकम से दो वक्त की रोटी का इंतजाम होना भी नामुमकिन हो जाता है।
मायके में अक्सर संपत्ति का कोई कानूनी या व्यावहारिक हिस्सा नहीं मिलता। वहीं, कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले माता-पिता भी हमेशा बेटी और उसके बच्चों का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं होते। इसी दोहरी मार से बचाने के लिए यह संस्थागत सहारा खड़ा किया जा रहा है।
यूसीसी लागू होने के बाद बोर्ड का अगला बड़ा कदम
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (Uniform Civil Code) की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद बोर्ड का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को सामाजिक और आर्थिक तौर पर मजबूती देने की दिशा में एक पूरक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए देहरादून समेत हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में वक्फ संपत्तियों के चिन्हीकरण पर भी नजर रखी जा रही है। बोर्ड की बैठक इसी महीने के अंत या अगले महीने की शुरुआत में प्रस्तावित है, जहां प्रस्ताव पास होने के बाद चयन प्रक्रिया और पात्रता के अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।









