देहरादून, 1 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में स्थानीय पहचान को नया स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नगर पंचायत सेलाकुई के वार्ड नंबर एक स्थित ‘अकबर कॉलोनी’ का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर ‘श्री राम एन्क्लेव’ कर दिया गया है। स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद वार्ड सभासद और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से यह परिवर्तन धरातल पर उतारा गया है।
नामकरण कार्यक्रम के दौरान सभासद विनोद कुमार (सिद्धू) ने बताया कि कॉलोनी के नाम परिवर्तन के लिए स्थानीय लोग लंबे समय से प्रयासरत थे। डीबीएस कॉलेज के प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी में पटिका का अनावरण कर नए नाम की घोषणा की गई। इस बदलाव को स्थानीय संस्कृति और जनभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्यक्रम में रोहित रस्तोगी, प्रेम सिंह सामंत और राजीव बिजलवान सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
गढ़ी कैंट में खत्म होगी ब्रिटिश कालीन पहचान
अकबर कॉलोनी के साथ-साथ राजधानी के सैन्य बाहुल्य क्षेत्र गढ़ी कैंट में भी बड़े स्तर पर नाम परिवर्तन की तैयारी पूरी हो चुकी है। गढ़ी कैंट बोर्ड की बैठक में उन सभी सड़कों और स्थानों के नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया गया है, जो अंग्रेजी शासन की याद दिलाते हैं। इन स्थानों का नाम अब भारतीय सेना के नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है।
बोर्ड की ओर से तैयार प्रस्ताव के मुताबिक, क्लेमेंटटाउन इलाके को अब ‘शौर्य नगर’ के नाम से जाना जाएगा। वहीं, छावनी क्षेत्र की सबसे प्रमुख ‘मालरोड’ का नाम बदलकर ‘द्रोणाचार्य मार्ग’ करने का सुझाव दिया गया है। नामित सदस्य विनोद पंवार के अनुसार, बोर्ड से पारित यह प्रस्ताव अब सेना की मध्य कमान को भेजा जा रहा है, जहाँ से हरी झंडी मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय इस पर अंतिम मुहर लगाएगा।
प्रस्तावित नामों की नई सूची
प्रशासनिक सुधार के तहत गढ़ी कैंट की विभिन्न सड़कों और विंग्स के लिए निम्नलिखित नाम प्रस्तावित किए गए हैं:
| पुराना नाम | नया प्रस्तावित नाम |
| यंग रोड | मेजर सोमनाथ मार्ग |
| बीचर रोड | मेजर धन सिंह थापा मार्ग |
| शेक्सपीयर रोड | एनके भवानी मार्ग |
| विंग नंबर 1 से 7 | लाजपतनगर, तिलकनगर, भगतनगर, अंबेडकरनगर, अटल नगर, पटेलनगर, सरोजनीनगर |
| स्मिथनगर | जसवंत नगर |
| जनरल विंग | सोमनाथनगर |
| स्पेशल विंग | विवेकानंद नगर |
सेलाकुई में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर पूर्ण हो चुकी है, जबकि गढ़ी कैंट के प्रस्तावों पर केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। गौरतलब है कि धामी सरकार पिछले एक साल से प्रदेश के विभिन्न जिलों में औपनिवेशिक और अप्रासंगिक नामों को बदलने की मुहिम चला रही है।









