उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर देहरादून में 23 अक्टूबर से EVM की प्रथम स्तरीय तकनीकी जांच शुरू होगी। डीएम ने राजनीतिक दलों की मौजूदगी अनिवार्य की।
देहरादून (19 अक्टूबर 2026) : उत्तराखंड विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की आधिकारिक तैयारियों का पहला तकनीकी चरण देहरादून में 23 अक्टूबर से जमीन पर उतरने जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और वीवीपीएटी पर उठने वाले राजनीतिक विवादों और अविश्वास को खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने सभी मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) कराने का फैसला किया है।
सोमवार को कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित अहम बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दलों के सामने पारदर्शी तरीके से पूरी होगी, ताकि डेटा रिकॉर्डिंग और हार्डवेयर की कार्यप्रणाली को लेकर कोई भी संशय न रहे।
राजनीतिक दलों के सामने होगी मशीनों की तकनीकी जांच
जिला निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, 23 अक्टूबर से शुरू होने वाली एफएलसी प्रक्रिया में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) या ईसीआईएल के अधिकृत इंजीनियर मशीनों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की एक-एक यूनिट को परखेंगे। डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि यह निर्वाचन प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील और अहम बुनियादी चरण है।
इस दौरान मॉक पोल के जरिए मशीनों की वोट रिकॉर्डिंग क्षमता जांची जाएगी। प्रशासन ने भाजपा, कांग्रेस, आप, बसपा और वाम दलों के प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे महज रस्म अदायगी न करें, बल्कि तय रोस्टर के अनुसार अपने अधिकृत एजेंटों को जांच केंद्र पर तैनात रखें, ताकि बाद में किसी तरह का तकनीकी विवाद न खड़ा हो।
दोहरे रेंडमाइजेशन से तय होगी हर विधानसभा की मशीन
बैठक में भारत निर्वाचन आयोग के सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए बताया गया कि तकनीकी जांच में पास होने वाली मशीनों को दो स्तरों पर रेंडमाइज किया जाएगा। पहले चरण में सॉफ्टवेयर के जरिए जिले की सभी विधानसभा सीटों के लिए ईवीएम का लॉट तय होगा। इसके बाद चुनाव प्रेक्षक की मौजूदगी में दूसरा रेंडमाइजेशन कर प्रत्येक मशीन को तय पोलिंग बूथ के साथ लिंक किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का डेटा निर्वाचन आयोग के ‘ईवीएम ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर’ (ईटीएस) पर लाइव दर्ज होगा, जिससे मतदान से पहले किसी भी स्तर पर मशीन की अदला-बदली या हेरफेर की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है।
प्रशासनिक अलर्ट और दलों की सक्रिय भागीदारी का खाका
ऋषिपर्णा सभागार में हुई बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, तहसीलदार सदर सुरेंद्र सिंह देव और जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली ने दलों के सवालों के जवाब दिए। बैठक में भाजपा के अरविंद जैन, कांग्रेस के जसविंदर सिंह व सुनील जायसवाल, सीपीआई (एम) के अनंत आकाश, बसपा के सत्यपाल और आम आदमी पार्टी के कमल राणा मौजूद रहे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एफएलसी हॉल में प्रवेश के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा रहेगा और बिना राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के दस्तखत के किसी भी ईवीएम को क्लीन चिट नहीं दी जाएगी। 23 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह तकनीकी अभियान आगामी विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक शुचिता की पहली बड़ी कसौटी साबित होगा।









