दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : सोशल मीडिया पर आसान कमाई और लॉटरी का लालच पहाड़ के सीधे-सादे लोगों की जिंदगी भर की कमाई निगल रहा है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में साइबर अपराध (Cyber Crime) का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।
यहां उखीमठ तहसील क्षेत्र स्थित किणझाणी गांव के रहने वाले 54 वर्षीय कमल सिंह साइबर शातिरों के ऐसे चंगुल में फंसे कि उन्होंने एक-दो बार नहीं, बल्कि कुल 57 बार में अपनी डेढ़ करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई लुटा दी। हैरानी की बात यह है कि ठगों को देने के लिए उन्होंने बैंकों से कर्ज उठाया और रिश्तेदारों तक से लाखों रुपये उधार ले लिए।
फेसबुक पर ‘चेहरा पहचानो’ गेम से शुरू हुआ जाल
मामले की शुरुआत इसी साल 14 जनवरी को हुई थी। कमल सिंह फेसबुक स्क्रॉल करते हुए कौन बनेगा करोड़पति के नाम से चल रहे ‘चेहरा पहचानो’ गेम से जुड़े। दावा किया गया था कि सही चेहरा पहचानने पर 8.5 लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। उन्होंने खेल में हिस्सा लिया और कुछ ही देर में उनके पास जीत का मैसेज आ गया।
इसके फौरन बाद नितिन नाम के एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर उनसे संपर्क साधा। उसने खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताते हुए दावा किया कि इनाम की राशि रिलीज कराने के लिए महज 1550 रुपये का टैक्स जमा करना होगा। यह पहली रकम ट्रांसफर होते ही ठगों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
लग्जरी कार और करोड़ों की लॉटरी का दिया झांसा
पहली रकम मिलने के बाद शातिरों ने कमल सिंह को बताया कि वे एक विशेष लकी ड्रॉ के तहत कई करोड़ रुपये और एक महंगी चार पहिया गाड़ी जीत चुके हैं। इसके बाद अलग-अलग प्रोसेसिंग फीस, आरबीआई क्लीयरेंस, जीएसटी और इंश्योरेंस चार्ज के फर्जी दस्तावेज दिखाकर उनसे पैसे ऐंठे जाने लगे।
आंखों पर लालच की ऐसी पट्टी बंधी कि वे लगातार पैसे ट्रांसफर करते चले गए। अपनी जमा पूंजी खत्म हुई तो उन्होंने विभिन्न बैंकों से लोन लिया और परिचितों के आगे हाथ फैलाए। यह सिलसिला जनवरी से लेकर 16 सितंबर तक बेरोकटोक चला। जब 16 सितंबर को आखिरी ट्रांजैक्शन के बाद भी नए चार्ज की मांग हुई, तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा खेल हो चुका है।
साइबर अपराध थाने में मुकदमा दर्ज, जांच में जुटी पुलिस
ठगी की भयावहता समझ आते ही पीड़ित ने देहरादून स्थित स्पेशल साइबर अपराध थाने की शरण ली। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल शुरू कर दी है।
साइबर अपराध थाने के प्रभारी निरीक्षक त्रिभुवन रौतेला के मुताबिक, पीड़ित की विस्तृत तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जिन 57 खातों में ट्रांजैक्शन हुए हैं, उनका डिजिटल ट्रेल खंगाला जा रहा है।
उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) लगातार चेतावनी जारी करती रही है कि लॉटरी, कौन बनेगा करोड़पति या किसी सेलिब्रिटी के नाम पर आने वाले फर्जी व्हाट्सएप मैसेज और कॉल्स पर कतई भरोसा न करें। यदि किसी भी नागरिक के साथ ऐसी धोखाधड़ी होती है, तो तत्काल नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर (Cyber Helpline) 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि प्राथमिक घंटों (Golden Hours) में बैंक खातों को फ्रीज कराया जा सके।









