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Chamoli Tunnel Collapse : चमोली में फिर बड़ी तबाही, निर्माणाधीन टनल में घुसा मलबा और पानी

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देहरादून, 13 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Chamoli Tunnel Collapse : चमोली जिले के मायापुर स्थित पीपलकोटी में एक बड़ा हादसा सामने आया है। गुरुवार शाम ठीक 7:05 बजे टीएचडीसी (THDC) की एक निर्माणाधीन टनल के अंदर अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी घुस गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि अंदर निर्माण कार्य कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला।

शुरुआती सूचना में टनल के अंदर 18 से 19 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई थी। प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय अधिकारियों ने कुल 22 मजदूरों के अंदर फंसे होने की पुष्टि की। टनल के भीतर अंधेरा और मलबे की मात्रा बहुत ज्यादा होने से मजदूरों की जान पर खतरा मंडराने लगा।

रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी ताकत और संसाधनों के साथ चलाया जा रहा है। अब तक 16 मजदूरों को मलबे और पानी के बीच से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बाहर निकाले गए मजदूरों की हालत घबराहट और ऑक्सीजन की कमी के कारण खराब है। मेडिकल टीमें उन्हें एंबुलेंस में तुरंत प्राथमिक उपचार दे रही हैं।

पीपलकोटी में इस टनल का निर्माण एचसीसी (HCC) कंपनी की तरफ से किया जा रहा है। प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर और कंपनी के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। बाकी बचे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए भारी मशीनों से टनल के मुहाने पर जमा मलबा हटाया जा रहा है।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए तत्काल भारतीय सेना की टुकड़ियों को बुला लिया गया। सेना के जवानों के साथ आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के बचावकर्मी टनल के अंदर घुसकर मोर्चा संभाले हुए हैं। सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर मौजूद भीड़ को नियंत्रित कर रही है। जिला प्रशासन ने टनल के ठीक बाहर टेंट लगाकर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरी घटना का सीधा संज्ञान लिया है। सीएम धामी खुद देहरादून सचिवालय से रेस्क्यू ऑपरेशन की एक-एक मिनट की रिपोर्ट ले रहे हैं। उन्होंने शासन के शीर्ष अधिकारियों को तत्काल ग्राउंड जीरो पर पहुंचने का सख्त आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टनल में फंसे एक-एक मजदूर की जान बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने चमोली जिला प्रशासन को राहत और बचाव कार्य के लिए किसी भी संसाधन की कमी न होने देने का आदेश दिया है। देहरादून से भी अतिरिक्त मशीनरी और मेडिकल स्टाफ चमोली की ओर रवाना कर दिया गया है।

चमोली जिला पिछले कुछ समय से लगातार प्राकृतिक और मानवीय आपदाओं का केंद्र बन चुका है। पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश ने जमीन को पूरी तरह से कच्चा कर दिया है। जगह-जगह हो रहे भूस्खलन और लैंडस्लाइड की घटनाओं ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

कुछ ही दिन पहले चमोली के तमकनाला में भी भयानक जनसैलाब आया था। पानी के तेज बहाव में वहां बना मजबूत बैली ब्रिज तिनके की तरह बह गया। इस ब्रिज के टूटने से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जोशीमठ-मलारी हाईवे पूरी तरह से ठप पड़ गया और सेना की आवाजाही रुक गई।

साल 2023 की 9 जनवरी की तारीख को चमोली के जोशीमठ में भयानक भू-धंसाव की खबरें दुनिया भर में गूंजी थीं। लोगों के घरों की दीवारों में चौड़ी दरारें आ गई थीं। दरारों का दायरा जमीन के भीतर तक पहुंच गया और पूरा शहर दहशत के साये में जीने को मजबूर हो गया था।

प्रशासन को उस समय जोशीमठ के दो सबसे बड़े होटलों को अपनी निगरानी में जमींदोज करना पड़ा था। हजारों लोगों ने अपने पुरखों के घर छोड़ दिए और उन्हें लंबे समय तक राहत शिविरों में रातें गुजारनी पड़ीं।

रैणी गांव की प्रलयकारी आपदा में भी करीब 200 लोग काल के गाल में समा गए थे। चमोली में लगातार हो रहे ये दर्दनाक हादसे पहाड़ के सीने पर गहरे घाव छोड़ रहे हैं। पीपलकोटी टनल में फंसे बाकी मजदूरों को निकालने के लिए रात भर ऑपरेशन चलने की उम्मीद है।

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