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Chardham Yatra 2026 : चारधाम यात्रा में इस वर्ष हुई कुल 268 मौतें, अकेले केदारनाथ में 131 श्रद्धालुओं ने तोड़ा दम

उत्तराखंड चारधाम यात्रा में अब तक 268 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है, जिनमें 259 मौतें स्वास्थ्य बिगड़ने से हुईं। केदारनाथ में सबसे ज्यादा 131 जानें गईं।

देहरादून (17 अक्टूबर) : उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में अब तक 59 लाख 48 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं, लेकिन इस भारी आस्था के बीच मौतों का बेहद डरावना आंकड़ा सामने आया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (USDMA) की 17 अक्टूबर की आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, इस यात्रा सीजन में अब तक कुल 268 तीर्थयात्रियों की जान जा चुकी है।

चिंता की बात यह है कि इनमें से 259 श्रद्धालुओं की मौत किसी सड़क हादसे या प्राकृतिक आपदा से नहीं, बल्कि अत्यधिक ठंड और कठिन चढ़ाई के कारण अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने से हुई है। केदारनाथ धाम इस मामले में सबसे संवेदनशील साबित हुआ है, जहां अकेले 131 श्रद्धालुओं ने दम तोड़ा है।

केदारनाथ में स्वास्थ्य बिगड़ने से सबसे ज्यादा मौतें

आपदा प्रबंधन केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केदारनाथ धाम में अब तक 17.41 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, लेकिन यहां मौतों की तादाद सबसे अधिक रही। केदारनाथ में कुल 131 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 123 तीर्थयात्रियों की जान सीधे तौर पर स्वास्थ्य बिगड़ने और कार्डियक अरेस्ट जैसे कारणों से गई। वहीं प्राकृतिक आपदा के चलते 7 मौतें और 1 घायल होने का मामला सामने आया, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं। बद्रीनाथ धाम में कुल 83 श्रद्धालुओं की जान गई, जिनमें 82 की मौत स्वास्थ्य खराब होने से हुई। इसके अलावा यमुनोत्री में 34 और गंगोत्री धाम में 20 तीर्थयात्रियों की मौत बीमारी के चलते दर्ज की गई है।

कठिन चढ़ाई और खराब मेडिकल स्क्रीनिंग बनी वजह

पर्वतीय क्षेत्रों में 11 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की भारी कमी और गिरता तापमान बाहरी राज्यों से आने वाले बुजुर्ग व बीमार श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जानकारों के मुताबिक, मैदानी इलाकों से सीधे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहुंचने वाले यात्रियों का शरीर मौसम के अनुकूल नहीं ढल पाता, जिससे हाइपोथर्मिया और साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

हालांकि सरकार ने अनिवार्य स्वास्थ्य जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन भारी भीड़ के दबाव के आगे जमीनी स्तर पर मेडिकल स्क्रीनिंग नाकाफी साबित हुई है। इस बीच, टिहरी बांध का जलस्तर 829.35 मीटर दर्ज किया गया है, जो 830 मीटर के खतरे के निशान से महज 0.65 मीटर नीचे है।

मौसम विभाग का अलर्ट और बंद मार्ग खोलने की चुनौती

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, 17 और 18 अक्टूबर को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के 3500 मीटर से ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार हैं, जबकि मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। राज्य भर में राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग सुचारू रूप से खुले हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में 10 संपर्क मार्ग अब भी मलबे के कारण अवरुद्ध हैं।

इनमें पिथौरागढ़ में 5, नैनीताल में 3, चमोली में 1 और रुद्रप्रयाग में 1 ग्रामीण सड़क शामिल है, जिन्हें खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई की टीमें जुटी हुई हैं। प्रशासन ने उच्च हिमालयी धामों में जाने वाले यात्रियों को पर्याप्त गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखने की सख्त हिदायत दी है।

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