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उत्तराखंड में कूड़ा फैलाने वाले होटल-उद्योगों पर कसेगा शिकंजा, मुख्य सचिव का सख्त फरमान

उत्तराखंड में प्लास्टिक और ठोस कचरा फैलाने वाले होटल, उद्योगों और बड़े प्रतिष्ठानों पर शिकंजा कसेगा। मुख्य सचिव ने दिए नई नियमावली कैबिनेट में लाने के निर्देश।

देहरादून (23 अक्टूबर) : उत्तराखंड के संवेदनशील पर्यटन स्थलों, शहरों और अर्धशहरी क्षेत्रों में अंधाधुंध कचरा फेंकने वाले होटल, रिजॉर्ट, औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर शासन सख्त कानूनी शिकंजा कसने जा रहा है। सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साफ हिदायत दी कि ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुपालन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सीधे भारी चालान और दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रदेश स्तर पर नई व्यावहारिक नियमावली (बायलॉज) तैयार कर शीघ्र मंत्रिमंडल के अनुमोदन के लिए भेजी जा रही है।

भारी कचरा पैदा करने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त पहरा

सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए कि निजी संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और भारी मात्रा में ठोस कचरा पैदा करने वाले (बल्क वेस्ट जनरेटर्स) व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जवाबदेही तय की जाए। संशोधित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत अब केवल औपचारिकता पूरी करने से काम नहीं चलेगा।

पैकेजिंग कचरे के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) को जमीन पर उतारना अनिवार्य होगा। कचरा निस्तारण की पूरी प्रक्रिया और की गई कार्रवाई का ब्योरा सरकारी डिजिटल पोर्टल पर नियमित अपलोड करना होगा, जिससे नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को तुरंत नोटिस और चालान थमाया जा सके।

पर्यटन स्थलों और पंचायतों में चालान का नया मॉडल

नैनीताल, मसूरी, ऋषिकेश समेत चारों धामों के मार्गों पर पर्यटकों की भारी आमद के कारण पहाड़ों में प्लास्टिक और ठोस कचरे का अंबार विकराल रूप ले चुका है। मुख्य सचिव ने कहा कि शहरी निकायों के साथ-साथ अधिक आवाजाही वाले ग्रामीण पर्यटन स्थलों में ग्राम पंचायतों और क्रियान्वयन एजेंसियों को सीधे अधिकार संपन्न बनाया जाएगा। बैठक में सचिव नितेश झा और रणवीर सिंह चौहान की मौजूदगी में यह तय हुआ कि अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल को सिर्फ मैदानी नगर निगमों तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

पहाड़ी कस्बों और ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे मौके पर ही वैज्ञानिक पृथक्करण सुनिश्चित कराएं और अवैध डंपिंग पर कानूनी चालान काट सकें।

कैबिनेट की हरी झंडी के बाद होगी सीधी कानूनी कार्रवाई

प्रशासनिक अमले को चेतावनी देते हुए मुख्य सचिव ने दो-टूक कहा कि नियम केवल फाइलों और कागजी बैठकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। राज्य में ‘स्वच्छ उत्तराखंड मिशन 2026-2030’ के लक्ष्य हासिल करने के लिए लैंडफिल साइट्स तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को न्यूनतम स्तर पर लाना अनिवार्य है। इसके लिए स्रोत पर ही कूड़े के पृथक्करण (सेग्रिगेशन), वैज्ञानिक परिवहन और रिसाइक्लिंग प्लांटों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

प्रस्तावित विस्तृत नियमावली को अंतिम रूप देकर इसी माह कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही पूरे राज्य में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निकाय और स्थानीय पुलिस-प्रशासन का संयुक्त प्रवर्तन अभियान शुरू होगा।

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