देहरादून, 29 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राजधानी देहरादून की सड़कों पर बुधवार को भारी गहमागहमी रही, जहां एक ओर कांग्रेस ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए ‘आक्रोश मार्च’ निकाला, वहीं भाजपा ने ‘मशाल यात्रा’ के जरिए महिला अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
इस सियासी शोर के बीच विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब बेहद आक्रामक अंदाज में दिया।
सदन में सीएम का कविता से प्रहार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति विधेयक को लेकर सदन में काव्य पंक्तियों के जरिए विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा, “नारी का अधिकार छीन तुम, इतना न अभिमान करो। बदली है अब युगधारा, उसका तो सम्मान करो।” मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर पूर्ववर्ती सरकारों और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस शक्ति को हमेशा रोका गया, वह आज स्वाभिमान के साथ खड़ी है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन को वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
मदरसा बोर्ड पर दो टूक: ‘शिक्षा में भेदभाव नहीं’
सदन की कार्यवाही के दौरान मदरसा बोर्ड को भंग किए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार का रुख साफ किया। सीएम धामी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कोई अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक नहीं होता। सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है ताकि वे मुख्यधारा का हिस्सा बन सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव बना रहना चाहिए और शिक्षा के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कतई स्वीकार्य नहीं है।
सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप
एक तरफ भाजपा महिला मोर्चा ने मशाल यात्रा निकालकर संदेश दिया कि वे महिला अधिकारों के मार्ग में आने वाली हर बाधा का जवाब देंगी। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि आरक्षण अब महिलाओं की मांग नहीं बल्कि हक है। दूसरी तरफ, कांग्रेस नेत्री ज्योति रौतेला और विनीत भट्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि 2023 में अधिनियम पारित होने के बावजूद जनगणना और परिसीमन के नाम पर महिलाओं को उनके हक से वंचित रखा जा रहा है।
विपक्ष ने उठाए मंशा पर सवाल
चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि संवैधानिक अधिकारों को लागू करने में देरी करना लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार पर टालमटोल करने और केवल बयानबाजी के जरिए जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। कांग्रेस का तर्क है कि जब कानून बन चुका है, तो इसे तुरंत धरातल पर उतारा जाना चाहिए।









