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देवभूमि में नहीं चलेगा कांग्रेस का कोई बहाना, महेंद्र भट्ट बोले – हार से हताश है विपक्ष

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष के प्रदर्शन को उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हताशा बताया है।

देहरादून (07 अक्टूबर) : चुनावी नतीजों में लगातार मिल रहे झटकों के बाद अब कांग्रेस संवैधानिक व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने पर उतर आई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR Process) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी हंगामे पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने दो टूक कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को संदेह के घेरे में खड़ा करके देश की अंतरराष्ट्रीय साख पर बट्टा लगाने की कोशिश की जा रही है।

हरिद्वार और राजधानी देहरादून के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के गहरे मायने हैं। दरअसल, आगामी केदारनाथ विधानसभा उप-चुनाव और निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच विपक्षी दल मतदाता सूची सत्यापन को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। भाजपा के अनुसार, हार की आशंका से घिरी कांग्रेस अब पहले से बहाने तलाशने में जुटी है।

संवैधानिक संस्थाओं की साख पर वार करने का आरोप

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने विपक्षी रणनीति को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। महेंद्र भट्ट ने कहा कि पहले आकाशवाणी और फिर जंतर-मंतर तथा हरिद्वार में हुए विरोध प्रदर्शनों का एकमात्र मकसद माहौल खराब करना है। उनका कहना था कि जब जनादेश पक्ष में नहीं आता, तब कांग्रेस कभी ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाती है तो कभी निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को चुनौती देती है। संस्थाओं की साख गिराकर राजनीतिक जमीन तलाशने का यह तरीका बेहद खतरनाक है।

जनता के भरोसे और विकास के एजेंडे पर जोर

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता अब इन राजनीतिक हथकंडों को भली-भांति पहचान चुकी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास योजनाओं का असर जमीन पर दिख रहा है और मतदाता विकास के साथ खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान नहीं किया, तो जनता उसे पूरी तरह किनारे कर देगी। उत्तराखंड की देवभूमि में हार से बचने के लिए गढ़े जा रहे ये नए तर्क किसी काम नहीं आने वाले हैं।

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