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उत्तराखंड के मदरसों में बदलेगा पाठ्यक्रम, पढ़ाया जायेगा समाज सेवा और भाईचारे का पाठ

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दून हॉराइज़न, देहरादून (17 अगस्त 2026): उत्तराखंड के मदरसों में शिक्षण व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में बड़ा फेरबदल लागू किया गया है। राज्य के सभी मदरसों में अब तालीम को सिर्फ पारंपरिक धार्मिक किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। बच्चों के संपूर्ण बौद्धिक और सामाजिक विकास के लिए पाठ्यक्रम में समाज सेवा, आपसी सौहार्द और नागरिक जिम्मेदारियों से जुड़े विशेष अध्याय शामिल किए गए हैं।

मदरसों के आयोजनों को लेकर भी व्यवस्था में बदलाव किया गया है। ईद, बकरीद और मुहर्रम जैसे प्रमुख त्योहारों पर होने वाले कार्यक्रमों में अब समाज के सभी वर्गों के लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। शिक्षण संस्थानों के जरिए सामाजिक संवाद बढ़ाने और विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति तैयार की गई है।

विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच और सेवा भाव को बढ़ावा देने के लिए ‘शुक्र की डायरी’ की शुरुआत की जा रही है। छात्र इस विशेष डायरी में अपने पूरे सप्ताह के दौरान किए गए किसी जरूरतमंद की मदद, नेक काम और सामाजिक योगदान का पूरा विवरण दर्ज करेंगे।

भाषाई दक्षता और संवाद क्षमता को मजबूत करने के लिए मदरसों में अब उर्दू के साथ-साथ नियमित रूप से हिंदी में भी वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाएंगी। इससे छात्रों में अपनी बात को स्पष्ट रूप से रखने और अन्य विचारों को सुनने की क्षमता विकसित की जा सकेगी।

प्रदेश में पूर्व में संचालित 452 मदरसे मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त थे। 30 जून को मदरसा बोर्ड भंग किए जाने के बाद इन सभी संस्थानों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन लाया गया है। बोर्ड भंग होने के डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी अब तक शिक्षा विभाग के पास केवल 60 मदरसों के मान्यता आवेदन जमा हुए हैं।

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्पष्ट किया है कि जो संचालक तय नियमों के तहत मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं कर रहे हैं और अवैध तरीके से छात्रों को प्रवेश दे रहे हैं, उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है। शासन को इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सोमवार तक सौंप दी जाएगी।

प्राधिकरण ने सभी मदरसा संचालकों को निर्धारित मानकों के तहत तुरंत पंजीकरण और मान्यता लेने के निर्देश दिए हैं। नए पाठ्यक्रम को आधुनिक शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान और संस्कारों के संतुलन के साथ जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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