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दो कमरों के टीन शेड में तैयार हो रहा था मौत का सामान, देहरादून NCB रेड में बड़ा खुलासा

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देहरादून, 18 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहसपुर में एक बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जांच में सामने आया है कि सहसपुर स्थित ‘ग्रीन हर्बल’ फैक्ट्री में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित ‘कैप्टागन’ ड्रग (जिसे ‘जिहादी ड्रग’ भी कहा जाता है) का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा था। इस हाई-टेक ड्रग लैब को चलाने के लिए फैक्ट्री मालिक को हर दिन 50 हजार रुपये का भारी-भरकम किराया मिलता था।

एजेंसी ने इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ‘ऑपरेशन रेजपिल’ (Operation Ragepill) शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत देश में पहली बार इस खतरनाक सिंथेटिक ड्रग की बरामदगी हुई है। मामले में कड़ियां जोड़ते हुए एनसीबी ने उत्तराखंड से एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है, जिससे पूछताछ की जा रही है।

सीरियाई नागरिक की निशानदेही पर छापेमारी

इस बड़े रैकेट का खुलासा तब हुआ जब एनसीबी ने करीब 227 किलोग्राम कैप्टागन (गोलियों और पाउडर के रूप में) जब्त करने के बाद अलब्रास अहमद नाम के एक सीरियाई नागरिक को दबोचा। जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में कुबूल किया कि यह ड्रग देहरादून के सहसपुर वाली फैक्ट्री में तैयार की गई थी। इस अवैध धंधे में एक अन्य सीरियाई नागरिक भी उसके साथ सक्रिय था। इसके तुरंत बाद एनसीबी की टीम ने शनिवार देर रात सहसपुर की फैक्ट्री में छापा मारा, जहां से अत्याधुनिक मशीनें, केमिकल और पैकेजिंग का सामान मिला।

जांच के दायरे में फैक्ट्री मालिक की भूमिका

एनसीबी की जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री मालिक महज परिसर का इस्तेमाल करने देने के बदले 50 हजार रुपये रोजाना किराया वसूल रहा था। हैरान करने वाली बात यह है कि फैक्ट्री मालिक का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह पहले से ही दो अन्य ड्रग मामलों में जांच एजेंसियों के रडार पर है। एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि इस सिंडिकेट के तार भारत के किन-किन राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहां तक फैले हैं।

दो कमरों और टीन शेड में छिपा था काला कारोबार

पकड़े जाने से बचने के लिए इस पूरे अंतरराष्ट्रीय ड्रग ऑपरेशन को फैक्ट्री के भीतर महज दो कमरों और एक टीन शेड वाले हिस्से में समेटा गया था। बाहर से देखने पर किसी को भनक न लगे, इसलिए इसे बेहद गोपनीय तरीके से संचालित किया जा रहा था। मौके से बरामद हाई-टेक मशीनरी और रसायनों की खेप से साफ है कि यहां बेहद योजनाबद्ध तरीके से प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का निर्माण चल रहा था।

पहले नकली दवा, अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट

सहसपुर का यह ग्रीन हर्बल परिसर पहले भी विवादों में रहा है। 6 दिसंबर 2024 को उत्तराखंड पुलिस ने इसी परिसर में नकली दवाएं बनाने के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। उस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया था, लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर इसे दोबारा खोल दिया गया।

अवैध काम बंद करने के बजाय इस परिसर को और बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का अड्डा बना दिया गया। ताजा खुलासे के बाद एनसीबी ने पूरी फैक्ट्री को दोबारा सील कर दिया है और यहां काम करने वाले अन्य लोगों की तलाश तेज कर दी है।

क्या है कैप्टागन ड्रग और क्यों है खतरनाक?

बिंदुविवरण
प्रचलित नामकैप्टागन (Captagon) या ‘जिहादी ड्रग’
प्रकृतिअत्यधिक उत्तेजक (High Stimulant) एम्फेटामाइन आधारित ड्रग
प्रभावइसे लेने के बाद व्यक्ति को लंबे समय तक नींद, भूख या थकान का अहसास नहीं होता।
वर्तमान स्थितिभारत में पहली बार उत्पादन इकाई पकड़ी गई; एनसीबी ने परिसर सील कर जांच शुरू की।

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