देहरादून, 11 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Dehradun Crime : देहरादून के मक्का वाला मसूरी रोड स्थित एक बंद मकान में हुई चोरी की बड़ी वारदात का राजपुर थाना पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दून के नेतृत्व में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत पुलिस टीम ने घटना में शामिल तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
इन आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने एक लाख पांच हजार रुपये की नगदी, चोरी में इस्तेमाल आला नकब और तीन ओप्पो कंपनी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पकड़े गए तीनों आरोपी कबाड़ बीनने का काम करते हैं और इसी की आड़ में बंद पड़े घरों की सुनियोजित तरीके से रेकी कर वारदातों को अंजाम देते थे।
सत्यविहार सहस्त्रधारा निवासी अजय सिंह ने 26 जून 2026 को थाना राजपुर में एक लिखित तहरीर दी थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी मालकिन अक्सर दिल्ली में रहती हैं और उनका एक मकान मक्का वाला मसूरी रोड पर स्थित है। अजय सिंह जब 26 जून को मकान की देखरेख के लिए वहां पहुंचे तो मुख्य गेट का ताला टूटा हुआ मिला।
घर के अंदर बरामदे में रखी पीतल की दो बड़ी मूर्तियां गायब थीं। इस तहरीर के आधार पर राजपुर पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305ए के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
चोरी की घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। इसके बाद थाना राजपुर में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। कुठाल गेट चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक प्रवीण सैनी के नेतृत्व में गठित इस टीम ने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने मक्का वाला मसूरी रोड और आसपास के आने-जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
संदिग्धों के हुलिए और आवाजाही के इनपुट्स जुटाने के लिए स्थानीय मुखबिर तंत्र को पूरी तरह सक्रिय किया गया। पूर्व में इस तरह की चोरियों में शामिल रहे अपराधियों का भौतिक सत्यापन भी किया गया।
पुलिस टीम की लगातार कोशिशों के बीच 10 जुलाई 2026 को एक पुख्ता कामयाबी हाथ लगी। चेकिंग के दौरान मुखबिर से मिली सटीक सूचना पर पुलिस ने भंडार गांव जंगल रोड के पास घेराबंदी की। घेराबंदी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन संदिग्धों को दबोच लिया, जिनकी पहचान मसूरी रोड चोरी मामले में वांछित अपराधियों के रूप में हुई।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि वे तीनों देहरादून के अलग-अलग इलाकों में कबाड़ बीनने और कबाड़ का काम करने के बहाने घूमते हैं। इस दौरान वे उन घरों को निशाना बनाते हैं जो काफी समय से बंद दिखाई देते हैं। मौका मिलते ही वे ताला तोड़कर अंदर घुस जाते हैं। 26 जून को भी उन्होंने मक्का वाला मसूरी रोड के इसी बंद मकान का ताला तोड़ा था और बरामदे में रखी पीतल की दो भारी मूर्तियां चुरा ले गए थे।
चोरों ने यह भी खुलासा किया कि चोरी के बाद वे माल को तुरंत नहीं बेचते बल्कि कुछ समय अपने पास छिपाकर रखते हैं। इस मामले में उन्होंने चुराई गई दोनों मूर्तियों को आईएसबीटी देहरादून स्थित एक कबाड़ी को बेच दिया था। मूर्तियों को बेचने से जो मोटी रकम मिली, उसे तीनों ने आपस में बराबर बांट लिया था। पुलिस टीम को आरोपियों के पास से उसी रकम में से बचे हुए 1,05,000 रुपये नकद मिले हैं।
जिस कबाड़ी को मूर्तियां बेची गई थीं, वह पिछले कई दिनों से अपनी दुकान बंद कर फरार चल रहा है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 33 वर्षीय जगदीप सिंह उर्फ जग्गी शामिल है, जो सतनाम सिंह का बेटा है और पटेल नगर थाने के कावली रोड शिवाजी मार्ग का रहने वाला है। दूसरा आरोपी 26 वर्षीय साकेंद्र उर्फ बुल्ला है, जो मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के बिशनपुर थाना अंतर्गत मसतासपुर का निवासी है और फिलहाल पटेल नगर के गांधी ग्राम में रह रहा था।
तीसरा आरोपी 23 वर्षीय मुखलिद है, जो जाकिर अली का बेटा है और बसंत विहार थाने के मेहुवाला इलाके का निवासी है। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में चौकी प्रभारी प्रवीण सैनी के साथ कांस्टेबल अमित और कांस्टेबल मोहित शामिल रहे।









