देहरादून, 07 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। शहर के पहले स्मार्ट वेंडिंग जोन, 6 नंबर पुलिया में दुकानों के आवंटन और संचालन को लेकर एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। नगर निगम की टीम द्वारा किए गए औचक सत्यापन में खुलासा हुआ है कि सरकारी नियमों को ताक पर रखकर यहां न केवल अपात्रों को दुकानें दी गईं, बल्कि कई दुकानें अब भी मृत व्यक्तियों के नाम पर कागजों में दर्ज हैं और मौके पर कोई और उन्हें चला रहा है।
स्थानीय पार्षद मेहरबान सिंह भंडारी की बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद बुधवार को नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। इस दौरान पाया गया कि जोन में आवंटित 95 वैध दुकानों के अलावा लगभग 40 ठेलियां पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रही थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक ही परिवार के पांच-पांच सदस्यों के नाम पर दुकानें आवंटित हैं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
किराए पर सरकारी दुकानें और अवैध कब्जा
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि 20 से अधिक दुकानों को मूल आवंटियों ने दूसरों को किराए पर दे रखा है। कुछ दुकानें तो ₹200 प्रतिदिन की दिहाड़ी पर चलाई जा रही हैं। इसके अलावा, वेंडरों ने अपनी दुकानों का आकार बढ़ाने के लिए उनमें लोहे और लकड़ी के अतिरिक्त ढांचे लगा लिए हैं। 4 फुट की निर्धारित चौड़ाई को दोगुना कर दिया गया है, जिसके कारण मुख्य सड़क पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है।
सुविधाएं ध्वस्त, बिजली की चोरी
छह साल पहले बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू किए गए इस स्मार्ट जोन की हालत अब खस्ता है। दुकानों पर लगी सोलर प्लेटें देखरेख के अभाव में खराब हो चुकी हैं। दुकानदारों ने सोलर पैनलों को पन्नियों से ढंक दिया है और वहां अवैध रूप से बिजली के कनेक्शन ले लिए हैं। नगर निगम की टीम ने पाया कि दुकानों के मूल स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया गया है, जिससे यह ‘स्मार्ट’ जोन अब अतिक्रमण का केंद्र बन गया है।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: मेयर
इस पूरे मामले पर मेयर सौरभ थपलियाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आवंटन प्रक्रिया में किसी भी निगम कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है, तो उस पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मेयर के अनुसार, गलत तरीके से चल रही दुकानों का आवंटन निरस्त किया जा सकता है और अतिक्रमण कर बनाई गई संरचनाओं को ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।









