देहरादून, 29 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।
राज्याधीन सेवाओं में 10% क्षैतिज आरक्षण का कानूनी लाभ धरातल पर लागू न होने से आक्रोशित राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों का बेमियादी धरना-प्रदर्शन आज 15वें दिन भी पूरी आक्रामकता के साथ जारी रहा। 15 दिनों से भूखे-प्यासे बैठे इन लोगों ने शासन व्यवस्था के खिलाफ सीधी बगावत कर दी है।
आज अनशन की कमान विकास नगर से पहुंचे रमेश थपलियाल के हाथों में रही। उनके साथ पछुवा दून क्षेत्र के जय कृष्णा सेमवाल और कार्यक्रम के मुख्य संयोजक अंबुज शर्मा भी सुबह से ही धरना स्थल पर डटे रहे। भीषण गर्मी और गिरते स्वास्थ्य के बावजूद इन नेताओं ने अन्न जल त्याग कर सरकार की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की।
प्रदेश के सुदूर पहाड़ी जनपदों से भी भारी संख्या में आंदोलनकारी देहरादून की सड़कों पर उतर रहे हैं। टिहरी जिले से नारायण दत्त भट्ट और नैनीताल से नवीन नैथानी ने धरना स्थल पहुंचकर अनशनकारियों की हौसला अफजाई की और शासन स्तर पर लटकी फाइलों की स्थिति मांगी। उत्तरकाशी से राम चंद्र नौटियाल अपने दर्जनों समर्थकों के साथ इस आंदोलन में कूद पड़े हैं।
महिला आंदोलनकारियों की भीड़ ने शासन-प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। उर्मिला शर्मा, देवेश्वरी देवी, बीना रावत, माहेश्वरी कंडारी और माया खत्री ने धरना स्थल पर मौजूद अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई और लंबित नियुक्तियों पर कड़े सवाल दागे। मनोज पुरोहित और पुष्पराज बहुगुणा ने मंच से हुंकार भरी। विनोद बटवाल ने भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सुरेश कुमार और बिल्लू वाल्मीकि ने नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही लेटलतीफी को नौकरशाही की घोर लापरवाही करार दिया है। मनोहर प्रसाद ध्यानी और सत्य नारायण भट्ट ने मंच से सीधी चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर यह आंदोलन गांव-गांव तक फैलेगा। विपिन रावत और शैलेश सेमवाल ने राज्य सरकार की रोजगार नीतियों पर निशाना साधा।
धर्मानंद भट्ट, प्रभात डंडरियाल, मोहम्मद इकबाल और इंद्रेश नौटियाल ने इस दौरान उत्तराखंड राज्य गठन के समय किए गए भीषण संघर्षों और शहादतों को याद किया। सुरेश थापा और अन्य प्रमुख राज्य आंदोलनकारियों ने एक सुर में सरकार को अल्टीमेटम दिया है।
सभी प्रमुख चेहरों ने शासन से दो टूक कहा है कि वह आंदोलनकारियों के धैर्य की परीक्षा लेना तत्काल बंद करे। 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के शासनादेश का अक्षरशः पालन करते हुए सभी पात्र आश्रितों को शीघ्र नियुक्ति दी जाए। प्रशासन की तरफ से 15 दिन लंबे इस अनशन को खत्म कराने के लिए अभी तक कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया है।









