हरिद्वार, 06 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने पूरे शबाब पर है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के पर्यटन कारोबार से इस बार उत्साह गायब है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद हरिद्वार के होटल, ढाबा और ट्रैवल सेक्टर को बड़ा झटका लगा है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, नए एक्सप्रेसवे के कारण यात्री अब हरिद्वार में रुकने के बजाय सीधे देहरादून और पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे शहर के पर्यटन कारोबार में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
एक्सप्रेसवे बना कारोबारियों की चिंता की वजह
दिल्ली से देहरादून का सफर अब महज ढाई से तीन घंटे का रह गया है। पहले दिल्ली, नोएडा, पंजाब और हरियाणा से आने वाले यात्री अनिवार्य रूप से हरिद्वार से होकर गुजरते थे, जिससे यहां के होटलों और ढाबों पर अच्छी रौनक रहती थी।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा का कहना है कि यात्री अब पुराने नेशनल हाईवे की जगह नए एक्सप्रेसवे को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि समय बच सके। इसका सीधा असर यह हुआ कि चारधाम यात्रा के शुरुआती दौर में भी हरिद्वार के कई होटल खाली पड़े हैं।
ढाबों और ट्रैवल सेक्टर पर भी दोहरी मार
सिर्फ होटल ही नहीं, बल्कि हाईवे किनारे चलने वाले ढाबों पर भी सन्नाटा पसरा है। ढाबा संचालक कमल खड़का के मुताबिक, अब केवल वीकेंड पर ही कुछ ग्राहक पहुंच रहे हैं, जबकि बाकी दिनों में काम काफी मंदा है। वहीं, ट्रैवल कारोबारियों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति के कारण गैस की किल्लत और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी की अफवाहों ने एडवांस बुकिंग पर ब्रेक लगा दिया है। ट्रैवल कारोबारियों को अप्रैल के महीने में उम्मीद के मुताबिक बुकिंग नहीं मिली है।
सरकार से टैक्स में राहत की गुहार
हरिद्वार को पारंपरिक रूप से चारधाम यात्रा का ‘प्रवेश द्वार’ माना जाता है, जहां माया देवी के दर्शन और गंगा स्नान के बाद यात्रा शुरू होती है। लेकिन बदलते रूट मैप ने इस परंपरा और व्यापारिक चक्र को प्रभावित किया है। होटल कारोबारी अखिलेश चौहान और अन्य संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस संकट को देखते हुए पर्यटन उद्योग को राहत दी जाए।
व्यापारियों का कहना है कि जब कमाई ही कम हो रही है, तो सरकार को बिजली, पानी और सीवर जैसे कमर्शियल टैक्स में रियायत देनी चाहिए ताकि होटल और अन्य प्रतिष्ठान अपना खर्च निकाल सकें।









