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देवभूमि के मदरसों में जुमे का अवकाश खत्म, धामी सरकार ने दी दो-टूक चेतावनी

उत्तराखंड के मदरसों में अब शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक अवकाश होगा। सीएम धामी ने साफ किया कि नियम न मानने वाले मदरसे राज्य में नहीं चलेंगे।

देहरादून (21 अक्टूबर) : उत्तराखंड के मदरसों में दशकों से चली आ रही शुक्रवार यानी जुमे की साप्ताहिक छुट्टी की व्यवस्था अब खत्म होने जा रही है। राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने साफ कर दिया है कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सभी मदरसों को अब सामान्य स्कूलों की तर्ज पर रविवार को ही छुट्टी रखनी होगी।

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है, जिस पर जल्द ही शासनादेश जारी होने वाला है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि राज्य में तुष्टीकरण की शिक्षा नीति नहीं चलेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी।

सामान्य स्कूलों की तर्ज पर अब रविवार को छुट्टी

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने शिक्षा विभाग को पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस कदम को समानता की दिशा में जरूरी बताते हुए कहा कि मान्यता मिलने के बाद मदरसे भी सामान्य विद्यालयों के दायरे में आते हैं। इसलिए कैलेंडर और साप्ताहिक अवकाश भी एक समान होना अनिवार्य है। सरकार का तर्क है कि आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समय-सारिणी में बदलाव जरूरी है, ताकि प्रशासनिक निगरानी और परीक्षाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए।

मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद सख्त हुए नियम

राज्य में यह प्रशासनिक सख्ती 1 जुलाई को मदरसा बोर्ड भंग किए जाने के बाद से लगातार बढ़ रही है। बोर्ड खत्म होने के बाद बने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के कुल 452 मदरसों में से आधे से अधिक संचालकों ने खुद ही ताले लगा दिए।

वर्तमान में केवल 76 मदरसों को शिक्षा विभाग से विधिवत मान्यता मिली है, जबकि 100 से अधिक आवेदन अभी लंबित हैं। इसके अलावा महज 35 मदरसों ने केवल धार्मिक शिक्षा के लिए अनुमति ली है। बिना मानकों के चल रहे संस्थानों पर विभाग पहले से ही शिकंजा कस रहा है।

जमीनी संकट के बीच आदेश पर उठे तीखे सवाल

एक तरफ अवकाश और नियमों को लेकर सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मान्यता प्राप्त मदरसों में बुनियादी सुविधाओं का गहरा संकट बना हुआ है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल के मदरसों में बच्चों को अब तक पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना का राशन और एनसीईआरटी की जरूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं।

केबीएन एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव निजाम अख्तर ने अल्पसंख्यक आयोग और बाल अधिकार संरक्षण आयोग से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। ऐसे में जमीनी स्तर पर पढ़ाई और पोषण की व्यवस्था दुरुस्त किए बिना केवल छुट्टी बदलने को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

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