दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : मानसून की मार झेल चुके देहरादून जिले में क्षतिग्रस्त सरकारी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई है। कलेक्ट्रेट परिसर के ऋषिपर्णा सभागार में बुधवार को बुलाई गई मैराथन समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने दो-टूक कह दिया कि निर्माण की गुणवत्ता पर रत्ती भर भी समझौता नहीं होगा। सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए अब अफसरों को सिर्फ कागजी एस्टिमेट भेजने से काम नहीं चलेगा—उन्हें प्रस्ताव के साथ बाकायदा प्रमाण पत्र लगाकर जिम्मेदारी लेनी होगी।
गलत एस्टिमेट पर बिफरे डीएम, बीडीओ को दोबारा सर्वे के निर्देश
समीक्षा के दौरान जब ब्लॉक और तहसील स्तर से आए कुछ प्रस्तावों की फाइलें खुलीं, तो उनमें तकनीकी खामियां और नियमों की अनदेखी सामने आई। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत तय दिशा-निर्देशों से इतर तैयार किए गए इन आकलनों पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDO) को स्पष्ट आदेश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में धरातल पर जाकर दोबारा जांच करें।
संशोधित प्रस्ताव जितनी जल्दी दाखिल होंगे, पुनर्निर्माण के लिए सरकारी खजाने से पैसा उतनी ही तेजी से निर्गत किया जाएगा।
लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
अक्सर देखा जाता है कि आपदा राहत कार्यों में आनन-फानन में अनाप-शनाप बजट मांग लिया जाता है और बाद में निर्माण की पोल पहली ही बारिश में खुल जाती है। इस बार जिला प्रशासन ने इस लूपहोल को बंद करने की तैयारी कर ली है। अब कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता और संबंधित विभागीय अफसरों को प्रस्ताव के साथ हस्ताक्षरित अंडरटेकिंग देनी होगी कि प्रस्तुत किए गए आंकड़े शत-प्रतिशत नियमों के अनुरूप हैं। काम में गड़बड़ी मिलने पर सीधी जवाबदेही इन्हीं प्रमाणित करने वाले अफसरों की तय की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी, अपर्णा ढौंडियाल और एसडीएम रविंद्र ज्वांठा मौजूद रहे। इनके अलावा लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई, लघु सिंचाई, जल संस्थान और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी भी मौजूद थे।
पहाड़ी और नदी तट से लगे कालसी, चकराता, त्यूणी और रायपुर के संवेदनशील ग्रामीण ब्लॉकों में आवागमन बहाल करने और ध्वस्त पेयजल लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराने का अल्टीमेटम दिया गया है, ताकि ठंड का मौसम शुरू होने से पहले बुनियादी जनजीवन पूरी तरह सामान्य हो सके।









