पौड़ी के पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। ठीक 8 साल बाद पार्टी छोड़ते हुए उन्होंने संगठन में घुटन का आरोप लगाया।
पौड़ी गढ़वाल (18 अक्टूबर) : उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गढ़वाल की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ है। पौड़ी विधानसभा के पूर्व विधायक और तीन बार नगरपालिका अध्यक्ष रहे यशपाल बेनाम ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दिलचस्प बात यह है कि ठीक आठ साल पहले 18 अक्टूबर के ही दिन वह भाजपा में शामिल हुए थे और ठीक उसी तारीख पर उन्होंने पार्टी से नाता तोड़कर स्वतंत्र राह चुनने का ऐलान किया। बेनाम ने संगठन में खुद को उपेक्षित रखने और लंबे समय से घुटन महसूस होने को अपने फैसले की मुख्य वजह बताया है।
आठ साल बाद ठीक उसी तारीख पर इस्तीफा
यशपाल बेनाम ने प्रेस से बातचीत में साफ कहा कि उनका राजनीतिक सफर हमेशा स्वतंत्र विचारों और जनसमर्थन के दम पर आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि ठीक 8 साल पहले 18 अक्टूबर के दिन ही उन्होंने भाजपा का दामन थामा था। बेनाम के मुताबिक, पार्टी में आठ साल बिताने के बावजूद संगठन ने उनकी राजनीतिक क्षमताओं का सही उपयोग नहीं किया। पार्टी के भीतर उन्हें समझने की कोशिश नहीं हुई और वह लगातार घुटन भरे माहौल में काम कर रहे थे। उन्होंने दो टूक कहा कि वह ऐसी परिस्थितियों में काम करने के आदी नहीं हैं, इसलिए प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला किया।
निर्दलीय जीत से शुरू हुआ था सियासी दबदबा
यशपाल बेनाम पौड़ी की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से मजबूत जनाधार वाले नेता माने जाते हैं। उन्होंने साल 2007 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरकर जीत दर्ज की थी और विधायक बने थे। इसके अलावा वह दो बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में और एक बार भाजपा के टिकट पर पौड़ी नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी संभाल चुके हैं। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच उनकी सीधी पकड़ रही है। पार्टी के भीतर जिम्मेदारियों और सम्मान को लेकर उनकी असहमति पिछले कुछ समय से चर्चा में थी, जो अब इस्तीफे के रूप में सामने आई है।
पौड़ी सीट पर नए समीकरणों की हलचल तेज
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी भाजपा के लिए पौड़ी जनपद में यह बड़ा झटका माना जा रहा है। यशपाल बेनाम ने अभी किसी अन्य दल में जाने या फिर से निर्दलीय मैदान में उतरने को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपने समर्थकों और स्थानीय जनता से संवाद कर अगले राजनीतिक कदम का फैसला लेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बेनाम का यह कदम पौड़ी सीट पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के चुनावी गणित को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।









