उत्तराखंड 98.7% साक्षरता दर के साथ देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बना है। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने ऐलान किया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में एक बच्चा होने पर भी स्कूल बंद नहीं होगा।
देहरादून (06 अक्टूबर) : देवभूमि उत्तराखंड ने बुनियादी शिक्षा के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए पूर्ण साक्षर राज्य (Literate State) का दर्जा हासिल कर लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत हुए सर्वे और अभियानों के बाद राज्य की साक्षरता दर 98.7 फीसदी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा केंद्र सरकार द्वारा तय 95 प्रतिशत के मानक से कहीं बेहतर है।
मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने यह घोषणा की। इस कीर्तिमान के साथ ही मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड इस सूची में शामिल होने वाला देश का छठा राज्य बन गया है।
दूरदराज के गांवों में एक छात्र पर भी चलेगा स्कूल
पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन और घटती छात्र संख्या के कारण प्राथमिक विद्यालयों के एकीकरण (School Merger) को लेकर लंबे समय से चिंताएं जताई जा रही थीं। शिक्षा मंत्री ने इस पर नीतिगत रुख साफ करते हुए कहा कि दुर्गम पर्वतीय गांवों में यदि केवल एक बच्चा भी पढ़ने वाला बचा होगा, तो वहां स्कूल पर ताला नहीं लटकाया जाएगा।
सरकार का साफ संदेश है कि भौगोलिक विषमताओं के बावजूद अंतिम छोर तक बुनियादी शिक्षा पहुंचाई जाएगी। इसके लिए शिक्षकों की तैनाती और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी गांव का बच्चा औपचारिक शिक्षा से वंचित न रहे।
अगले छह माह में 100% साक्षरता का संकल्प
वर्तमान 98.7% के आंकड़े को पूर्ण 100% तक पहुंचाने के लिए शिक्षा विभाग ने अगले छह महीनों की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। छूटे हुए वयस्क निरक्षरों की पहचान के लिए ब्लॉक स्तर पर सघन सर्वे कराया जा रहा है।
इस पूरे अभियान की रीढ़ करीब 25 हजार वॉलिंटियर्स रहे, जिनमें स्थानीय शिक्षक, कॉलेज छात्र, नव-साक्षर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। इन्होंने पर्वतीय ढलानों से लेकर सुदूर घाटियों तक घर-घर जाकर साक्षरता कक्षाएं चलाईं।
उच्च शिक्षा में 50% जीईआर का रोडमैप
स्कूली शिक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) को वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। डॉ. रावत के मुताबिक, एनईपी-2020 के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कॉलेजों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार तेज किया गया है।
कार्यक्रम में कैंट विधायक सविता कपूर, भारत सरकार की अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी, विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव और अपर सचिव नमामि बंसल सहित शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।









