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हरीश रावत ने देहरादून में जलाए 101 और 111 दीप, बापू और राजीव गांधी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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दून हॉराइज़न, देहरादून (24 सितंबर) : देहरादून की सियासत में आज की शाम गांधीवादी विचारों और दीपों की जगमगाहट के नाम रही। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) ने शहर के व्यस्त डिस्पेंसरी रोड और गांधी पार्क पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को दीयों की रोशनी के बीच भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान कांग्रेसियों ने न सिर्फ दीपदान किया, बल्कि दोनों विभूतियों के ऐतिहासिक फैसलों को मौजूदा राजनीतिक हालात से जोड़ते हुए कार्यकर्ताओं को वैचारिक जमीन पर लौटने का आह्वान भी किया।

डिस्पेंसरी रोड से गांधी पार्क तक दीयों की श्रृंखला

कार्यक्रम की शुरुआत शहर के डिस्पेंसरी रोड स्थित पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमा से हुई। यहां हरीश रावत की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 101 दीप जलाए। इसके ठीक बाद काफिला राजपुर रोड स्थित ऐतिहासिक गांधी पार्क पहुंचा, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के आगे 111 दीप प्रज्वलित किए गए।

दीयों की लौ के बीच माहौल तब पूरी तरह आध्यात्मिक और गांधीवादी हो गया, जब उपस्थित कार्यकर्ताओं ने एक सुर में “रघुपति राघव राजा राम”, “वैष्णव जन तो तेने कहिए” और “दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल” जैसे भजनों का गायन शुरू किया।

18 वर्ष में मताधिकार और पंचायती राज पर जोर

हरीश रावत ने देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज पूरा देश एक बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे मोड़ पर बापू के सत्य-अहिंसा और राजीव गांधी के आधुनिक भारत के विजन को याद करना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राजीव गांधी ने ही भारतीय युवाओं पर भरोसा जताते हुए मतदान की आयु सीमा घटाकर 18 वर्ष की थी— जिससे देश की एक पूरी नई पीढ़ी लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ी। साथ ही 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक मजबूती दी, जिसने ग्रामीण भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की राह खोली। दूसरी तरफ, बापू ने बिना हथियार उठाए दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को झुकाकर अहिंसा की असली ताकत समझाई थी।

एकजुट दिखा कांग्रेस कुनबा

राजधानी के इस आयोजन में कांग्रेस का मजबूत सांगठनिक ढांचा नजर आया। पूर्व मुख्यमंत्री के साथ पूर्व विधायक राजकुमार, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष लालचंद शर्मा, वीरेंद्र पोखरियाल, महेंद्र गुरु और प्रदेश मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इनके अलावा अर्जुन सोनकर, सुनील बांगा, संजय कनौजिया, कमल रावत, प्रकाश सती, ओमप्रकाश सती, सुलेमान अली, मोहन काला, सूरज छेत्री, अमित रावत, नितिन चंचल, अभिषेक सिंह, आशीष देसाई, सुनीता प्रकाश, पिया थापा, देवेंद्र कौर, अल्पना जदली, दीवान सिंह बिष्ट, संजय थापा, सुशील राठी, शरीफ अहमद बेग, विकास चौहान, मुकेश सोनकर, अमी चंद सोनकर, हर्ष बागड़ी, शुभम चंद, अरुणा कुमार, वंश चौधरी, अनिल बागड़ी, मनीष नागपाल, मोहम्मद फैजल, यश ठाकुर और करण वाल्मीकि सहित भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। हरीश रावत ने अंत में साफ कहा कि इन महापुरुषों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि नारों में नहीं, बल्कि उनके सामाजिक न्याय और समानता के रास्ते पर चलने में है।

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