दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : उत्तराखंड बीजेपी में जौनसार-बावर के चकराता विधानसभा इलाके की अंदरूनी गुटबाजी सोमवार को राजधानी देहरादून स्थित प्रदेश पार्टी मुख्यालय की चौखट पर खुलकर बिखर गई।
पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में शक्ति प्रदर्शन की कोशिश उस वक्त औंधे मुंह गिरी, जब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान और दर्जाधारी राज्य मंत्री गीता राम गौड़ की अगुवाई में पहुंचे चकराता के 26 परिवारों के करीब 60 समर्थकों को सदस्यता दिलाए बिना ही वापस भेज दिया गया। समाज कल्याण मंत्री खजान दास के ऐन वक्त पर दफ्तर पहुंचकर किए गए कड़े एतराज के चलते यह समूचा सदस्यता अभियान (BJP Joining Ceremony) बीच में ही ठप करना पड़ा।
आवास से दफ्तर तक पहुंचा योजनाओं का विवाद
इस सियासी टकराव की पृष्ठभूमि चौबीस घंटे पहले रविवार को तैयार हो गई थी। तब चकराता के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने यमुना कॉलोनी स्थित कैबिनेट मंत्री खजान दास के सरकारी आवास का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की थी।
कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप था कि समाज कल्याण विभाग की अनुसूचित जाति उप योजना (SCSP) और जनजाति उप योजना (TSP) के तहत स्वीकृत होने वाले विकास कार्यों में मूल कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों को दरकिनार किया गया। प्रदर्शनकारियों ने यहां तक आरोप मढ़ा कि विभागीय योजनाओं में करीब 15 से 20 फीसदी की कथित कमीशनखोरी चल रही है और विपक्षी कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले लोगों को रेवड़ियों की तरह लाभ बांटा जा रहा है।
आरोपों की आंच तेज होते ही खजान दास ने दो टूक सफाई दी थी कि अगर इन दावों में एक फीसदी भी सच्चाई निकली, तो वे तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। मंत्री का तर्क था कि वे किसी एक हल्के के नहीं, बल्कि पूरे राज्य के मंत्री हैं और स्वीकृतियां तय सरकारी प्रक्रिया के तहत ही हुई हैं।
दफ्तर पहुंचे मंत्री और ‘सस्ते आदमी’ वाला तंज
सोमवार दोपहर जब चकराता के लोग गाड़ियों के काफिले के साथ बलबीर रोड स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे, तो लगा कि नए चेहरों को जोड़कर क्षेत्र में राजनीतिक बढ़त बनाई जाएगी। माहौल तब पूरी तरह बदल गया जब खजान दास सीधे कार्यालय पहुंच गए।
अंदरखाने तीखा विरोध दर्ज कराने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने मंत्री से ज्वाइनिंग रुकवाने की वजह पूछी, तो वे पहले असहज दिखे और सवालों से बचते रहे। फिर अचानक 2027 के विधानसभा चुनाव और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की बात दोहराने लगे। जब रिपोर्टर्स ने दोबारा टोकते हुए पूछा कि आखिर इन 60 लोगों को पार्टी में क्यों नहीं लिया गया, तो मंत्री ने तंज भरे लहजे में कहा कि वे तो एक “सस्ते आदमी” हैं और तेज कदमों से गाड़ी की तरफ बढ़ गए।
सियासी पंडित इस पूरी तल्खी को चकराता के स्थानीय समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, चकराता सीट दशकों से कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रीतम सिंह का अभेद्य किला रही है, जहां बीजेपी भीतरघात और आपसी खींचतान के चलते कभी कमल नहीं खिला पाई।
संगठन का बचाव और विपक्ष को मिला सियासी हथियार
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम पर फजीहत से बचने के लिए संगठन ने तुरंत तकनीकी दांव चला। बीजेपी प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने स्थिति संभालते हुए बयान जारी किया कि इस कार्यक्रम की कोई पूर्व सूचना संगठन को विधिवत नहीं दी गई थी। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की गैर-मौजूदगी को आधार बनाते हुए कार्यक्रम को स्थगित करने की बात कही गई।
बातचीत से मामला सुलझाने के दावे चाहे जितने किए जाएं, लेकिन पार्टी दफ्तर से मायूस होकर चकराता लौटे समर्थकों के भीतर पनपा असंतोष आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में संगठन के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।









