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बदरीनाथ यात्रा के दूसरे चरण में बढ़ी भारी भीड़, कपाट बंदी से पहले दर्शन के लिए पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु

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दून हॉराइज़न, चमोली/देहरादून (24 सितंबर) : उच्च हिमालय में स्थित भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham) में इस यात्रा सीजन ने सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं। कपाट बंद होने की औपचारिक प्रक्रिया में अभी डेढ़ महीने से अधिक का वक्त बाकी है, लेकिन धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 17 लाख 79 हजार 805 के पार जा चुकी है। पिछले पूरे यात्रा वर्ष का आंकड़ा 17,78,298 था, जिसे इस बार महज 153 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया गया।

तीर्थयात्रियों की यह आमद बताती है कि मॉनसून की सुस्ती छंटते ही चारधाम यात्रा का दूसरा चरण कितनी तेज गति पकड़ चुका है।

आपदा और महामारी के झटकों के बाद नया शिखर

उत्तराखंड चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के पिछले पच्चीस सालों के आधिकारिक आंकड़े देखें तो यात्रा की रफ्तार सिर्फ दो मौकों पर गंभीर रूप से थमी-पहला 2013 की केदारनाथ जलप्रलय के वक्त और दूसरा कोविड-19 महामारी के दौर में। इन दो असाधारण झटकों को छोड़कर तीर्थयात्रियों का ग्राफ साल-दर-साल ऊपर ही चढ़ा है। 23 अप्रैल को कपाट खुलने के साथ शुरू हुई यह यात्रा 22 सितंबर तक आते-आते नए शिखर पर पहुंच गई। ऑलवेदर रोड नेटवर्क, पर्वतीय पड़ावों पर सुधरे ट्रांजिट कैंप और स्वास्थ्य चौकियों की सक्रियता ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं का हौसला बढ़ाया है।

सेना के बैंड और पौंणा नृत्य के बीच संपन्न हुआ माता मूर्ति मेला

रिकॉर्ड आमद के बीच बावन द्वादशी (वामन द्वादशी) पर बदरीनाथ से लगे देश के प्रथम गांव माणा में पारंपरिक माता मूर्ति उत्सव पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। दोपहर में बदरीनाथ मंदिर में बाल भोग अर्पित किए जाने के बाद गर्भगृह के कपाट अस्थायी तौर पर बंद किए गए। इसके तुरंत बाद उद्धव जी के उत्सव विग्रह की डोली गाजे-बाजे के साथ नारायण पर्वत की तलहटी में स्थित माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना हुई।

सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के पाइप बैंड की धुन पर बदरी विशाल के जयकारे गूंजते रहे। माणा की स्थानीय भोटिया जनजाति की महिलाओं ने पारंपरिक पौंणा नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को भावुक कर दिया। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) द्वारा मां मूर्ति को राजभोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में माणा के ग्रामीणों और यात्रियों में वितरित किया गया।

रावल के आवागमन से जुड़ा दुर्लभ विधान

धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान बदरी विशाल हर साल अपनी माता मातामूर्ति के आमंत्रण पर उनसे मिलने करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करके यहां आते हैं। मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नम्बूदरी ने यहां संपूर्ण वैदिक रीति से पूजा संपन्न कराई।

इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण पहलू मुख्य पुजारी की मर्यादा से जुड़ा है। कपाट खुलने के दिन से लेकर वामन द्वादशी तक रावल बदरीनाथ के पवित्र ‘पंचशीला’ क्षेत्र की परिधि से बाहर कदम नहीं रख सकते। यह अत्यंत कड़ा धार्मिक नियम है। वामन द्वादशी के दिन माता मूर्ति पूजन संपन्न होने के साथ ही यह पाबंदी समाप्त हो जाती है और रावल को क्षेत्र से बाहर आवागमन की धार्मिक अनुमति मिल जाती है।

मंदिर समिति के अनुसार, 15 सितंबर से शुरू हुए दूसरे चरण में जिस तरह प्रतिदिन हजारों की संख्या में पंजीकरण और आवाजाही हो रही है, उससे उम्मीद है कि शीतकाल में कपाट बंद होने तक कुल आंकड़ा 20 लाख के पार निकल सकता है।

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