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JioPC : पहले हजारों खर्च कर खरीदते थे डेस्कटॉप, अब सिर्फ ₹500 महीने में चलेगा पूरा कंप्यूटर

रिलायंस जियो ने जियोपीसी सेवा शुरू की। पुराने टीवी और लैपटॉप को क्लाउड से कंप्यूटर बनाएं। 16GB रैम और 1TB स्टोरेज के सस्ते प्लान से छात्रों को बड़ा फायदा।

देहरादून (12 अक्तूबर 2026) : रिलायंस जियो ने देश के छात्रों और शिक्षण संस्थानों को 30 से 50 हजार रुपये के महंगे कंप्यूटर और लैपटॉप खरीदने के झंझट से मुक्ति दिलाने के मकसद से ‘जियोपीसी’ (JioPC) सेवा शुरू कर दी है। इस क्लाउड-आधारित सेवा के जरिए अब घर में पड़े किसी भी पुराने मॉनिटर, डेस्कटॉप या टीवी स्क्रीन को आधुनिक कंप्यूटर में बदला जा सकेगा। कंपनी की इस पहल से छात्र बिना भारी-भरकम पूंजी लगाए कोडिंग, वेब ब्राउजिंग, ग्राफिक्स डिजाइन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे आधुनिक टूल्स का सीधा इस्तेमाल कर सकेंगे।

बिना नया हार्डवेयर खरीदे टीवी बनेगा ताकतवर क्लाउड कंप्यूटर

जियोपीसी दरअसल एक वर्चुअल क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक है, जिसमें यूजर को अपने घर पर सीपीयू रखने की कोई जरूरत नहीं होती। कंपनी ने इसे सीधे वेब ब्राउजर और जियो सेट-टॉप बॉक्स से जोड़ दिया है। यानी अगर किसी के पास सिर्फ एक टीवी और सेट-टॉप बॉक्स है, तो वह कीबोर्ड और माउस जोड़कर उसे तुरंत पर्सनल कंप्यूटर बना सकता है।

इसमें पहले से ओपन-सोर्स उबंटू (Ubuntu) ऑपरेटिंग सिस्टम, लिब्रेऑफिस और ब्राउजर मौजूद मिलेंगे, साथ ही माइक्रोसॉफ्ट 365 और एडोबी एक्सप्रेस जैसे टूल्स भी काम करेंगे। क्षमता के आधार पर दो विकल्प दिए गए हैं। 8 जीबी रैम और 500 जीबी स्टोरेज वाला बेसिक प्लान दो महीने के लिए 1,000 रुपये, पांच महीने के लिए 2,000 रुपये और सालाना 4,000 रुपये में मिलेगा। वहीं भारी टास्क के लिए 16 जीबी रैम और 1 टीबी स्टोरेज वाला ‘जियोपीसी अल्ट्रा’ प्लान दो महीने के लिए 1,200 रुपये और एक साल के लिए 5,000 रुपये में उपलब्ध कराया गया है।

किसी भी इंटरनेट पर काम करेगा यह सिस्टम

इस पूरी कवायद का सबसे अहम पहलू यह है कि कंपनी ने इसे केवल जियो के नेटवर्क तक सीमित नहीं रखा है। यदि कोई यूजर किसी अन्य टेलीकॉम या लोकल केबल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करता है, तब भी वह एक्टिव सब्सक्रिप्शन के साथ किसी भी ब्राउजर पर जियोपीसी में लॉग-इन कर सकेगा। सुरक्षा के मोर्चे पर कंपनी ने इसमें ‘जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ और ऑटोमैटिक डेटा रिकवरी की सुविधा दी है।

सारा डेटा यूजर के लोकल हार्डवेयर में रहने के बजाय क्लाउड पर सुरक्षित रहेगा। अगर कभी स्क्रीन, कीबोर्ड या पुराना मॉनिटर खराब हो जाए या चोरी हो जाए, तो भी प्रोजेक्ट फाइलें या जरूरी डेटा खत्म नहीं होगा; किसी भी अन्य स्क्रीन पर दोबारा लॉग-इन करते ही काम वहीं से शुरू हो जाएगा।

स्कूलों की कंप्यूटर लैब अपग्रेड पर घटेगा भारी खर्च

सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और स्किल ट्रेनिंग सेंटरों के लिए कंप्यूटर लैब तैयार करना हमेशा से लाखों रुपये के भारी बजट का सौदा रहा है। हर तीन साल में पुराने सिस्टम कबाड़ हो जाते हैं और नए हार्डवेयर का खर्च छोटा संस्थान वहन नहीं कर पाता। जियोपीसी के जरिए ऐसे संस्थान पुराने डिस्प्ले और सामान्य इंटरनेट के सहारे पूरी लैब को आधुनिक एआई और कोडिंग लैब में बदल सकेंगे।

इसके अतिरिक्त, जियोहोम ब्रॉडबैंड वाले ग्राहकों को हर महीने 100 रुपये का डिस्काउंट वाउचर भी दिया जा रहा है। महंगे हार्डवेयर की एकमुश्त मार झेलने के बजाय छोटे कस्बों के परिवारों के लिए यह मंथली रेंटल मॉडल सीधे तौर पर पढ़ाई की लागत घटाने का काम करेगा।

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