देहरादून, 19 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का विधिवत आगाज़ हो गया है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे और इसी दिन से केदारनाथ घाटी में हेलीकॉप्टर सेवाएं (Kedarnath Heli Service) भी शुरू हो जाएंगी। इस वर्ष उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने यात्रा को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए किराए की नई दरों और सख्त संचालन नियमों को लागू किया है।
किराए का नया गणित
यूकाडा द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, इस बार श्रद्धालुओं के लिए किराए का अनुभव मिला-जुला रहने वाला है। सबसे बड़ी राहत सिरसी रूट पर मिली है, जहाँ आने-जाने का किराया पिछले साल के मुकाबले ₹2,753 कम होकर अब ₹6,086 तय किया गया है। वहीं, गुप्तकाशी से किराया ₹290 की कटौती के साथ ₹12,154 कर दिया गया है। इसके विपरीत, फाटा से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को ₹838 अधिक चुकाने होंगे, यहाँ का नया किराया ₹9,680 निर्धारित है। ध्यान रहे कि इन दरों में जीएसटी और आईआरसीटीसी का ऑनलाइन शुल्क अतिरिक्त देय होगा।
उड़ानों पर सख्त नियंत्रण और एटीसी की निगरानी
हवाई यातायात को नियंत्रित करने के लिए इस बार शटल सेवाओं की संख्या सीमित कर दी गई है। गुप्तकाशी और फाटा से प्रतिदिन अधिकतम 24-24 और सिरसी से 32 शटल उड़ानों की ही अनुमति होगी। सुरक्षा के लिहाज से सोनप्रयाग और केदारनाथ में विशेष कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहाँ एटीसी (Air Traffic Control) अधिकारी तैनात रहकर पायलटों को मौसम और रूट की रियल-टाइम जानकारी देंगे। जिला पर्यटन एवं हेली सेवा नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की अनियमितता या रिफंड में देरी पर संबंधित ऑपरेटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टिकट बुकिंग और रिफंड की नई व्यवस्था
कालाबाजारी को जड़ से खत्म करने के लिए 100% ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य कर दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी IRCTC के पास है। टिकट 20-20 दिनों के स्लॉट में जारी किए जाएंगे ताकि मौसम और भीड़ के अनुसार संतुलन बना रहे। इस बार चिप्सन एविएशन, थम्बी और हिमालयन हेली सर्विसेज समेत कुल 8 कंपनियां सेवाएं दे रही हैं, जिनमें से 4 कंपनियां पहली बार इस रूट पर उतर रही हैं।
24 घंटे गर्म पानी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा का एलान किया है। अब धाम और लिनचोली स्थित जीएमवीएन परिसरों में श्रद्धालुओं को 24 घंटे गर्म पानी मिलेगा। इसके लिए ‘पिरुल’ (चीड़ की पत्तियां) और खच्चरों के गोबर से चलने वाले बायोमास गीजर लगाए गए हैं। यह पहल न केवल यात्रियों को राहत देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।









