SIR प्रक्रिया और दिल्ली में वकीलों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में AILU ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
देहरादून (13 अक्टूबर 2026) : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और दिल्ली में प्रदर्शनकारी वकीलों पर कथित पुलिस बर्बरता के खिलाफ अधिवक्ताओं ने सीधा संवैधानिक टकराव छेड़ दिया है। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) की देहरादून जिला कमेटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से बर्खास्त करने की मांग उठाई है।
यूनियन ने महामहिम राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में साफ कहा कि चुनाव आयोग पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराने में अपनी साख खो रहा है, जिससे नागरिकों के बुनियादी मताधिकार पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
देहरादून में आयोजित सभा के दौरान वकीलों ने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। वकीलों का स्पष्ट कहना है कि लोकतंत्र की नींव स्वतंत्र चुनाव और जनता के अटूट भरोसे पर टिकी होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कटारिया ने की, जबकि संचालन अनुराधा मैंदोला ने संभाला।
सभा में बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के सदस्य व पूर्व चेयरमैन रजिया बेग और सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। AILU ने मांग की कि जब चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही संदेह के बादल घिरने लगें, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में अनिवार्य कदम है।
SIR के नाम पर वोट काटने का आरोप
विवाद की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लागू किए जा रहे नए नियम बने हैं। यूनियन ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर आम मतदाताओं से भारी-भरकम दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर गरीब, प्रवासी और वंचित वर्ग के नागरिकों को मताधिकार की परिधि से बाहर करने का जरिया बन सकता है।
अब्दुल रऊफ, संदीप चमोली, हसन मंसूर और दिलीप चंद सहित कई वक्ताओं ने चिंता जताई कि सत्यापन के इस पेचीदा जाल में लाखों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटने का जोखिम पैदा हो गया है। अधिवक्ताओं ने दो टूक मांग रखी कि इस मनमानी SIR प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के प्रत्येक नागरिक का वोट सुरक्षित रखा जाए।
दोषी पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी तक जारी रहेगा यह आंदोलन
ज्ञापन में दिल्ली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया, जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं, छात्राओं और महिलाओं पर कथित तौर पर लाठीचार्ज और अभद्रता की गई थी। AILU ने इसे नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया। वकीलों ने मांग की कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त कर कानूनी शिकंजे में लाया जाए। सभा में शम्भु प्रसाद ममगाईं, कविता गैरोला, निशा खान, महेंद्र पाल, जब्बर सिंह नेगी, बहुला रावत, हिमांशु खाती और नवनीत कांत शर्मा सहित दर्जनों अधिवक्ताओं ने ऐलान किया कि जब तक मताधिकार और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा तय नहीं हो जाती, यह कानूनी व जमीनी संघर्ष जारी रहेगा।









