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उत्तराखंड MBBS फर्जीवाड़े में बड़ी कार्रवाई, मेरठ से सिंडिकेट सरगना समेत दो गिरफ्तार

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दून हॉराइज़न, देहरादून (24 सितंबर) : उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षित सीटों पर दाखिला दिलाने वाले अंतरराज्यीय रैकेट का देहरादून पुलिस ने बड़ा पर्दाफाश किया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मेरठ से कंसलटेंसी संचालक रूपेश पंडित और एक मेडिकल छात्रा के पिता को गिरफ्तार कर लिया।

यह सिंडिकेट ‘अपणि सरकार’ (Apuni Sarkar) डिजिटल पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाता था। हैरानी की बात यह है कि गिरोह ने पहचान छुपाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स का सहारा लेकर दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी की फर्जी तस्वीर तक गढ़ी।

45 लाख रुपये में एक सीट, AI से गढ़ा ‘फर्जी दादा’

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह प्रत्येक अभ्यर्थी से 45-45 लाख रुपये वसूलता था। मूल रूप से बिहार का रहने वाला मास्टरमाइंड रूपेश पंडित मेरठ में एडमिशन कंसलटेंसी चलाता था। रैकेट ने देहरादून के दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय धर्मवीर सिंह का गोपनीय डेटा चुराया। इसके बाद धर्मवीर सिंह को दादा दर्शाते हुए परी, तृप्ति, स्वाति और खुशी समेत छह अभ्यर्थियों के जाली प्रमाण पत्र जारी करवा लिए। असली खेल तब खुला जब नीट (NEET UG) काउंसलिंग और कॉलेज दाखिले के मूल पतों का मिलान किया गया—दोनों जगह पते पूरी तरह अलग निकले।

फील्ड जांच के बिना शाम को हुए दस्तखत, 2 पटवारी नपे

देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक, 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमनटाउन थाने में पटवारियों की ओर से पांच नामजद मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इसके बाद एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित हुई। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह और एडीएम प्रशासन स्मृता परमार की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम डॉ. आशीष चौहान को सौंपी।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बिना किसी स्थलीय सत्यापन (Field Verification) के शाम पांच बजे के बाद आनन-फानन में डिजिटल हस्ताक्षर किए गए। जिलाधिकारी के निर्देश पर दो पटवारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो डाटा एंट्री ऑपरेटरों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकी है।

सिस्टम में बार-बार सेंध, 12 अन्य आरोपी रडार पर

इस खुलासे ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य के डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम में गंभीर छेद हैं। यह पहला मौका नहीं है—इससे पहले बेसिक शिक्षा विभाग में 12 हजार शिक्षकों की जांच के दौरान 84 फर्जी पाए गए थे, जिनमें 60 को बर्खास्त किया गया। वहीं नर्सिंग अधिकारी भर्ती में भी जाली स्थायी निवास प्रमाण पत्र के मामले पकड़े जा चुके हैं।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय या सीबीआई जांच की मांग करते हुए पूछा है कि पोर्टल का गोपनीय डेटा सिंडिकेट तक पहुंचाने वाले बड़े अफसरों पर शिकंजा कब कसेगा। फिलहाल एसआईटी की टीम मेरठ और दिल्ली एनसीआर में 12 अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

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