देहरादून और मसूरी में ट्रैफिक जाम से निजात के लिए प्रशासन ने कसी कमर। एमडीडीए बनाएगा नया मास्टर प्लान, शटल सेवा और पार्किंग पर फोकस।
देहरादून (28 अक्टूबर) : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और पर्यटक नगरी मसूरी में आए दिन लगने वाले भीषण जाम से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को स्थायी राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ऋषिपर्णा सभागार में हुई उच्चस्तरीय बैठक में साफ कर दिया है कि अब पारंपरिक जुगाड़ से काम नहीं चलेगा, बल्कि शहर के बाहर से ही वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक ठोस और व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत शहर के भीतर अनावश्यक ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए शटल सेवा और नए पार्किंग मॉडल पर जोर दिया जा रहा है।
मसूरी के लिए शहर के बाहर बनेंगे बाईपास विकल्प
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पर्यटन सीजन के दौरान मसूरी की ओर जाने वाले वाहनों का सैलाब सीधे देहरादून शहर के भीतर से गुजरता है, जिससे मुख्य मार्गों पर पहिए थम जाते हैं। इसे रोकने के लिए अब शहर के बाहरी इलाकों से ही वाहनों को डायवर्ट करने या बाईपास रूट देने की संभावनाओं पर अध्ययन किया जा रहा है। योजना के तहत मसूरी मार्ग पर पार्किंग क्षमता बढ़ाने और चुनिंदा पॉइंट्स से पर्यटकों के लिए शटल सेवा शुरू करने की प्रभावी रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि पहाड़ों की रानी जाने वाले पर्यटकों को भी सुगम सफर मिल सके।
एमडीडीए और यातायात पुलिस तैयार करेगी मास्टर प्लान
यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि वह यातायात पुलिस, परिवहन विभाग और टाउन प्लानर के साथ मिलकर एक साझा मास्टर प्लान तैयार करे। इसमें सड़क कनेक्टिविटी सुधारने, जंक्शनों का आधुनिकीकरण करने और वैकल्पिक मार्गों की तलाश करने पर फोकस रहेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे देश के अन्य भीड़भाड़ वाले पर्यटन शहरों के सफल ट्रैफिक मॉडल का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार देहरादून में लागू करें।
23 प्रस्तावित पार्किंग स्थलों की होगी कड़ी समीक्षा
बैठक में यह भी सामने आया कि पूर्व में शहर के भीतर 23 अलग-अलग स्थलों पर पार्किंग बनाने के प्रस्ताव तैयार किए गए थे। जिलाधिकारी ने इन सभी पुराने प्रस्तावों की फाइलें फिर से खुलवाकर उनकी जमीनी उपयोगिता और व्यवहार्यता की समीक्षा करने के आदेश दिए हैं। प्रशासन का यह रुख साफ करता है कि केवल कागजों पर पार्किंग स्थल चिह्नित करने के बजाय यह परखा जाएगा कि उस स्थान पर निर्माण से वाकई ट्रैफिक का दबाव कम होगा या नहीं।
संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी और एसडीएम सदर को तमाम लैंड पार्सल और डीपीआर की रिपोर्ट जल्द सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधारों को जमीन पर उतारा जा सके।









