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MDDA का बड़ा एक्शन, मसूरी से दून तक 7 अवैध निर्माण सील

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने नियमों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे 7 अवैध व्यावसायिक निर्माणों को सील कर दिया है। उपाध्यक्ष ने दी कड़ी चेतावनी।

देहरादून (28 अक्टूबर) : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने राजधानी देहरादून और पर्यटन नगरी मसूरी में अनियोजित विकास के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। प्राधिकरण की टीम ने बिना किसी मानचित्र स्वीकृति और अनुमति के धड़ल्ले से चल रहे सात अवैध व्यावसायिक निर्माणों को मौके पर सील कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से अवैध निर्माणकर्ताओं और भूमाफियाओं में हड़कंप मच गया है, जबकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एमडीडीए का कड़ा शिकंजा, सात निर्माण सील

प्राधिकरण की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह ताबड़तोड़ कार्रवाई मसूरी से लेकर देहरादून के कई पॉश और व्यस्त इलाकों में की गई। मसूरी के घंटाघर रोड पर होटल गोल्डन हैवन के पास बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण किया जा रहा था, जिसे टीम ने तुरंत सील कर दिया। इसके अलावा संस्कृति लोक कॉलोनी और टर्नर रोड क्षेत्र में बजाज डेयरी के पास तथा ओगल भट्टा इलाके में संचालित हो रहे अवैध व्यावसायिक निर्माणों पर भी एमडीडीए का हंटर चला है। इन सभी जगहों पर बिना अनुमति के कॉमर्शियल गतिविधियां और निर्माण कार्य चल रहे थे, जिन्हें सीलिंग के दायरे में लाया गया है।

नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक चेतावनी

प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि शहर में तेजी से बढ़ती आबादी के बीच सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई लोग नियमों को ताक पर रखकर आवासीय क्षेत्रों में भी अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण खड़े कर रहे हैं, जिससे बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ रहा है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति के हो रहे निर्माणों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में लगातार गश्त करें और अनधिकृत निर्माणों की तुरंत पहचान कर सीलिंग की कार्रवाई करें।

कोर्ट और प्राधिकरण के अगले कदम

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने भी स्पष्ट किया है कि शहर के विकास को मानकों के अनुरूप चलाना ही प्राधिकरण का मुख्य संकल्प है। निर्माणकर्ताओं और भवन स्वामियों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह का नया कार्य शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से मानचित्र स्वीकृत कराएं। यदि इसके बाद भी नियमों की अवहेलना पाई जाती है, तो सीलिंग के साथ-साथ भारी जुर्माने और ध्वस्तीकरण जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन के इस रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में अवैध निर्माणों के खिलाफ यह अभियान और अधिक तेज किया जाएगा।

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