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आधी रात को टनल में आई मिट्टी और पानी, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर बड़ा खतरा टला

रुद्रप्रयाग, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। हिमालय की कच्ची पहाड़ियों के बीच बिछ रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना को एक ही दिन में दो बड़े झटकों का सामना करना पड़ा है।

सोमवार की आधी रात को रुद्रप्रयाग के पास निर्माणाधीन इमरजेंसी टनल में अचानक मिट्टी और पानी के रिसाव के साथ धंसाव हो गया। इस हादसे ने सुरंग के भीतर काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरा-तफरी मचा दी, हालांकि वक्त रहते शोर मचने से सभी सुरक्षित बाहर निकल आए।

घटना रुद्रप्रयाग की जवाड़ी चौकी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर 7B पैकेज के निर्माण स्थल पर हुई। रात करीब 11:30 बजे जब टनलिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक ऊपरी हिस्से से भारी मात्रा में मिट्टी और पानी गिरने लगा। पुलिस उपाधीक्षक विकास पुंडीर ने मौके का मुआयना करने के बाद बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित हिस्से में आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। निर्माण कंपनी ‘मेगा’ के तकनीकी विशेषज्ञों को ही वहां जाने की इजाजत दी गई है।

मेगा कंपनी के जनसम्पर्क अधिकारी महेश भट्ट के मुताबिक, यह समस्या मेन टनल और एस्केप टनल के बीच बने क्रॉस पैसेज में पानी जमा होने की वजह से आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य टनल पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन प्रभावित हिस्से को ठीक करने में कम से कम तीन से चार दिन का समय लगेगा।

श्रीनगर में मुआवजे की आग 

सुरंग के धंसने के बीच, श्रीनगर नगर निगम के रेवड़ी कांडई और टीचर्स कॉलोनी के प्रभावितों ने रेलवे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले साल हुए भू-धंसाव में अपने आशियाने गंवा चुके 9 परिवारों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया। नाराज लोगों ने श्रीनगर से लेकर डुंगरीपंथ तक रेलवे का काम पूरी तरह बंद करवा दिया और निर्माण कंपनी के दफ्तरों पर ताले जड़ दिए।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि टनल निर्माण के लिए की जा रही भारी ब्लास्टिंग की वजह से उनके घरों में दरारें आईं और जमीन धंसी। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और रेलवे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि जब तक पक्का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक मशीनों को चलने नहीं दिया जाएगा।

हिमालय की संरचना बनी सबसे बड़ी चुनौती

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट सिर्फ विरोध ही नहीं, बल्कि भूगर्भीय चुनौतियों से भी जूझ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रेल लाइन ‘मेन बाउंड्री थ्रस्ट’ (MBT) जैसे संवेदनशील जोन से गुजर रही है, जहां मिट्टी और चट्टानें काफी अस्थिर हैं। यही कारण है कि कई जगहों पर ठोस चट्टानों के बजाय केवल कॉम्पैक्ट मिट्टी मिल रही है, जिससे सुरंगों में रिसाव और धंसाव का खतरा बना रहता है। इस देरी और जटिलताओं के कारण ही प्रोजेक्ट की डेडलाइन को 2026 से बढ़ाकर 2028 तक ले जाने की चर्चा तेज हो गई है।

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