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निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या, हरिद्वार में चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला

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दून हॉराइज़न, हरिद्वार (18 सितंबर) : बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, उसका शव भूपतवाला इलाके में स्थित एक मंदिर के सामने बनी चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

हरिद्वार में शुरू की थी नई जिंदगी

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मृतक सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण तहसील अंतर्गत मंगरुखाल गांव का रहने वाला था। पिछले कुछ महीनों से वह हरिद्वार में ही शरण लिए हुए था और अपनी आजीविका चलाने के लिए संघर्ष कर रहा था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उसने घटना से मात्र तीन दिन पहले ही सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने यह चाय का खोखा किराए पर लिया था।

चाय की दुकान खोलने से पहले वह इलाके में एक निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा था। स्थानीय स्तर पर उसकी किसी से कोई पुरानी रंजिश या विवाद की बात अभी तक सामने नहीं आई है।

पुलिस जांच और पारिवारिक पृष्ठभूमि

हरिद्वार शहर कोतवाली के अंतर्गत आने वाली सप्त ऋषि पुलिस चौकी को आज सुबह इस दुखद घटना की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने तुरंत घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के दुकानदारों व स्थानीय लोगों से पूछताछ कर तथ्य जुटाए। पुलिस के स्थानीय अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी कि अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट हाथ नहीं लगा है।

शुरुआती दौर की जांच-पड़ताल में पारिवारिक कलह को ही इस आत्मघाती कदम के पीछे की वजह माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही है ताकि मौत के वास्तविक कारणों से पर्दा उठाया जा सके। मृतक के परिजनों को अल्मोड़ा में आधिकारिक तौर पर सूचना भेज दी गई है, जिनके आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

निठारी कांड और कानूनी लड़ाई का लंबा इतिहास

यह पूरा घटनाक्रम देश को झकझोर देने वाले उस कुख्यात निठारी हत्याकांड से जुड़ा है जो साल 2006 में नोएडा के सेक्टर 31 स्थित कोठी नंबर D-5 से सामने आया था। उस दौरान इस वीभत्स मामले में कोठी के मालिक मनेंद्र सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को पुलिस ने दबोचा था। इस सनसनीखेज मामले में कुल 16 गंभीर मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें हत्या, दुष्कर्म और अन्य अमानवीय धाराओं के तहत निचली अदालतों से लेकर उच्च स्तर तक सुनवाई चली थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दौर में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी जिसे बाद में साल 2015 में उम्रकैद में बदल दिया गया था।

लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद पिछले साल 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली को सभी मामलों में निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था, जिसके बाद वह जेल से रिहा होकर बाहर आ गया था। मुख्य आरोपी मनेंद्र सिंह पंढेर को भी पहले ही कानूनी प्रक्रियाओं के तहत मामलों से राहत मिल चुकी थी।

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