देहरादून के पल्टन बाजार में एडीएम की बैठक और 8 घंटे की नो-एंट्री का आदेश कागजी साबित हुआ। बाजार में भारी वाहन घुसने से दिनभर भीषण जाम लगा रहा।
देहरादून (27 अक्टूबर): राजधानी देहरादून के दिल कहे जाने वाले पल्टन बाजार में त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को राहत देने के प्रशासनिक दावे धरातल पर पहले ही दौर में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। कलेक्ट्रेट में आला अफसरों की बैठकों और कड़े निर्देशों के बावजूद पल्टन बाजार में ‘नो व्हीकल’ नियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक 8 घंटे के सख्त वाहन प्रतिबंध के बावजूद बाजार के भीतर बड़े और व्यावसायिक वाहन बेरोक-टोक दाखिल हो रहे हैं, जिसके चलते त्योहार की खरीदारी करने निकले पैदल खरीदारों, महिलाओं और बुजुर्गों का चलना दूभर हो गया है।
कागजों में सिमटी बैठक और बेबस नजर आई ट्रैफिक पुलिस
त्योहारी व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि भीड़भाड़ को देखते हुए पल्टन बाजार में सुबह 11 से शाम 7 बजे तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और व्यापारियों को केवल निर्धारित समय से पहले या बाद में ही लोडिंग-अनलोडिंग की अनुमति होगी। लेकिन जमीनी हकीकत इन औपचारिक दावों से कोसों दूर दिखी।
ग्राउंड जीरो पर ट्रैफिक पुलिस वाहनों को मुख्य मोड़ों पर रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। नियम ताक पर रखकर पिकअप, लोडर और दोपहिया वाहन दिन के व्यस्ततम समय में भी बाजार के संकरे रास्तों में घुसते रहे।
आला अफसरों की मौजूदगी के बावजूद जमीनी क्रियान्वयन शून्य
प्रशासनिक बैठक में उप जिलाधिकारी मुख्यालय हर्षिता सिंह, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, सीओ ट्रैफिक जगदीश पंत समेत व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य पंकज मैसोन और हरीश विरमानी मौजूद थे। बैठक में पुलिस और नगर निगम को अतिक्रमण और अवैध रेहड़ी-ठेलियों पर सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे।
इसके बावजूद पल्टन बाजार के प्रवेश द्वारों—घंटाघर, कोतवाली और धामावाला चौक पर प्रभावी बैरिकेडिंग या निगरानी का कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं दिखा। नतीजा यह रहा कि नियम लागू होने के पहले ही दिन बाजार में वाहनों की कतारें लग गईं और पूरा इलाका भीषण जाम की चपेट में आ गया।
त्योहारी सीजन से पहले अगर नहीं चेते तो हालात होंगे बेकाबू
पल्टन बाजार में वाहनों की मनमानी एंट्री से न सिर्फ स्थानीय खरीदार बल्कि आपातकालीन सेवाओं के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया था कि एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए रास्ता हर हाल में सुगम रखा जाएगा, लेकिन संकरी गलियों में भारी वाहनों के फंसने से यह रास्ता भी पूरी तरह अवरुद्ध हो रहा है।
स्थानीय लोगों और खरीदारों का कहना है कि प्रशासन के निर्देश सिर्फ प्रेस नोट और मीटिंग हॉल तक सीमित रह गए हैं। यदि प्रवेश बिंदुओं पर नियमित पुलिस बल तैनात कर भारी वाहनों की आवाजाही पर तुरंत सख्त पाबंदी नहीं लगाई गई, तो आने वाले धनतेरस और दीपावली के दिनों में पल्टन बाजार में व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर जाएगी।









