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Pithoragarh : पिथौरागढ़ में चीन सीमा हाईवे के लिए टूटेंगे 480 मकान, प्रशासन का अल्टीमेटम

चीन सीमा को जोड़ने वाले पिथौरागढ़ हाईवे के चौड़ीकरण की जद में 480 मकान और दुकानें आ गई हैं। प्रशासन ने जगह खाली करने के लिए महज एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है, जिससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है।

पिथौरागढ़ : चीन सीमा तक सेना की आसान पहुंच बनाने के लिए पिथौरागढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग का काम अब अंतिम चरण में है। इसी तेजी के बीच टनकपुर-तवाघाट एनएच पर 480 मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चलना तय है। प्रशासन ने इन भवनों को खाली करने के लिए महज एक सप्ताह का नोटिस थमाया है।

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नोटिस मिलते ही स्थानीय लोगों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। सामरिक लिहाज से बेहद अहम इस सड़क के चौड़ीकरण की जद में आ रहे भवन स्वामियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि एक हफ्ता बहुत कम है, उन्हें शिफ्टिंग के लिए कम से कम तीन महीने की मोहलत दी जाए।

कहां और क्यों चल रही है कार्रवाई?

टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 150 किमी सड़क ऑल वेदर रोड बन चुकी है। अब असली चुनौती बलुवाकोट के बिन्या गांव से तवाघाट तक के 35 किलोमीटर के हिस्से में है। यह हिस्सा संकरा है और यहीं आबादी सबसे ज्यादा घनी है। प्रशासन को सड़क चौड़ी करने के लिए यहां के 480 ढांचे हटाने पड़ रहे हैं। इसमें पक्के मकान, दुकानें और गौशालाएं शामिल हैं।

धारचूला से तवाघाट की ओर काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन आबादी वाले इलाकों में मुआवजे की प्रक्रिया के कारण काम रुका हुआ था। अब जैसे ही मुआवजा बंटा, प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है।

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90 करोड़ का मुआवजा और आंशिक तोड़फोड़

राहत की बात यह है कि अधिकतर मकान पूरी तरह नहीं, बल्कि आंशिक रूप से टूट रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण में बाधक बन रहे मकानों का केवल आगे का हिस्सा हटाया जाएगा। कई लोगों ने सरकारी कार्रवाई के इंतजार के बिना खुद ही अपने मकान तोड़ने शुरू कर दिए हैं।

स्थानीय निवासी एसएस दताल ने बताया कि उनके भवन का चार फीट हिस्सा जद में था, जिसे उन्होंने मजदूर लगाकर हटा दिया है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित परिवारों को कुल 90 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। इसमें से 70 करोड़ बांटे जा चुके हैं और शेष 20 करोड़ भी जल्द वितरित करने का दावा है।

प्रशासन सख्त, लोग मांग रहे वक्त

कालिका और छारछुम जैसे कस्बों में नोटिस चस्पा होने के बाद अफरा-तफरी का माहौल है। डीएम आशीष भटगांई ने स्पष्ट किया है कि नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि हाईवे के विस्तारीकरण का काम जल्द पूरा करना राष्ट्रहित में जरूरी है, इसलिए अधिकारियों को काम में तेजी लाने को कहा गया है।

हालांकि, प्रभावित परिवारों और दुकानदारों का तर्क है कि कई लोगों को अभी मुआवजा नहीं मिला है। सिर्फ सात दिनों में घर और रोजगार दोनों शिफ्ट करना नामुमकिन है, इसलिए मानवीय आधार पर दो से तीन महीने का वक्त मिलना चाहिए।

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