दून हॉराइज़न, देहरादून (13 सितंबर): उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh Karnaprayag Railway Project) ने एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है, जहां 10.847 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया। यह नई सुरंग अब जम्मू-कश्मीर की 12.895 किलोमीटर लंबी सुरंग-49 के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी रेलवे टनल बन गई है।
शुक्रवार को ढालवाला से नीर गड्डू के बीच दोनों सिरों को आपस में जोड़ दिया गया। इस कामयाबी के साथ 125 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर में अब तक 41 अलग-अलग सुरंगों (मुख्य और निकास मिलाकर) की खुदाई का काम पूरा हो चुका है।
हिमालय की कमजोर चट्टानों के बीच 10.8 किमी की खुदाई
यह ब्रेकथ्रू केवल एक निर्माण कार्य पूरा होना भर नहीं है, बल्कि सिविल इंजीनियरिंग का एक असाधारण नमूना भी है। जिस भूभाग से यह 10.847 किमी लंबी सुरंग निकाली गई है, वह भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील और अस्थिर माना जाता है। पूरी टनल अत्यधिक दबाव वाली, कई परतों में मुड़ी और भ्रंश (फॉल्ट) वाली चट्टानों से होकर गुजरती है।
विशेष रूप से मेन बाउंड्री थ्रस्ट (Main Boundary Thrust) के इलाके में भारी मात्रा में माइलोनाइट जोन मौजूद था, जहां चट्टानें बार-बार खिसकती और दरकती रहीं। परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा के अनुसार, करीब एक हजार इंजीनियर और श्रमिक चौबीसों घंटे शिफ्टों में जुटे रहे, तब जाकर ढालवाला से नीर गड्डू का यह हिस्सा सुरक्षित रूप से आर-पार हो पाया।
देश की सबसे लंबी सुरंगों में दर्ज हुआ नाम
भारत में सबसे लंबी रेलवे सुरंग का रिकॉर्ड इस समय जम्मू-कश्मीर में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के कटरा-बनिहाल खंड पर स्थित खारी और बनिहाल के बीच की सुरंग-49 के नाम है, जिसकी कुल लंबाई 12.895 किलोमीटर है। अब उत्तराखंड की यह 10.847 किमी लंबी एस्केप सुरंग-1 सीधे दूसरे पायदान पर आ गई है।
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) इस पूरी 125 किलोमीटर लंबी न्यू ब्रॉडगेज लाइन का निर्माण कर रहा है। उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने स्पष्ट किया कि 125 किमी की इस परियोजना में कुल 28 मुख्य सुरंगे हैं, जिनमें से 22 का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
चारधाम कनेक्टिविटी और बाकी 5 ब्रेकथ्रू का लक्ष्य
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन बनने के बाद गढ़वाल क्षेत्र में परिवहन का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अभी ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से सफर तय करने में 6 से 7 घंटे का समय लगता है, जो रेल शुरू होने के बाद घटकर महज 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के बाकी बचे 5 ब्रेकथ्रू अगले एक वर्ष के भीतर पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग का अंतिम चरण शुरू होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में बनी नई सुरंग की लंबाई कितनी है?
उत्तर: नई पूरी हुई एस्केप टनल-1 की लंबाई 10.847 किलोमीटर है, जो देश की दूसरी सबसे लंबी रेलवे सुरंग है।
प्रश्न: इस परियोजना से ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा समय कितना घटेगा?
उत्तर: रेल मार्ग चालू होने के बाद सड़क के 6-7 घंटे का सफर घटकर लगभग 2 से 2.5 घंटे का रह जाएगा।









