दून हॉराइज़न, रुद्रप्रयाग (21 सितंबर) : दुनिया के सबसे ऊंचे शिव धामों में शुमार तुंगनाथ की यात्रा पर आई एक महिला श्रद्धालु की पैदल मार्ग पर संतुलन बिगड़ने के चलते गहरी खाई में गिरकर दर्दनाक मौत हो गई।
हादसा रविवार शाम करीब 6:21 बजे उस वक्त हुआ जब महिला ट्रेक से गुजर रही थी। गणेश मंदिर के पास अचानक पांव फिसलने से वह अनियंत्रित होकर सीधी सैकड़ों फीट गहरी ढलान में समा गई। आसपास मौजूद अन्य तीर्थयात्रियों के शोर मचाने पर हड़कंप मच गया। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (District Emergency Operation Centre) को सूचना मिलते ही तुरंत राहत दल सक्रिय किए गए।
चीखें सुनाई देती रहीं, लेकिन अंधेरे ने बांधे रेस्क्यू टीमों के हाथ
हादसा कितना भयावह था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ढलान में गिरने के काफी देर बाद तक महिला की आवाजें ऊपर खड़े लोगों और टीमों को सुनाई देती रहीं। कंट्रोल रूम ने बिना वक्त गंवाए अगस्त्यमुनि से एसडीआरएफ (SDRF), ऊखीमठ से डीडीआरएफ (DDRF) और तुंगनाथ बेस पर तैनात आपदा मित्रों को मौके के लिए रवाना किया।
रस्सियों और सर्च लाइटों के सहारे जवान नीचे उतरने की कोशिश में जुटे रहे। मगर तुंगनाथ का यह इलाका बेहद संकरा, पथरीला और सीधा खड़ा ढलान लिए हुए है। रात करीब 12:30 बजे तक जवान जान जोखिम में डालकर खाई की टोह लेते रहे। आखिरकार डीडीआरएफ के कुलदीप सिंह की रिपोर्ट के बाद सर्च ऑपरेशन को कुछ घंटों के लिए स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा। घने कोहरे, कड़ाके की ठंड और जीरो विजिबिलिटी के बीच खाई में उतरना रेस्क्यू दल के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता था।
सुबह दोबारा शुरू हुआ महा-सर्च, बरामद हुआ शव
सोमवार तड़के सूरज की पहली किरण के साथ ही टीमों ने दोबारा उस खतरनाक खाई में रस्सियां डालीं। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद जवान उस जगह तक पहुंचे जहां महिला अचेत पड़ी थी। जांच के बाद उसे मृत पाया गया। जवानों ने बेहद जटिल प्रक्रिया के जरिए शव को स्ट्रेचर पर बांधकर मुख्य पैदल मार्ग तक पहुंचाया।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने पुष्टि करते हुए बताया कि शव को खाई से बाहर निकाल लिया गया है और अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए राजस्व व स्थानीय पुलिस को सौंपा जा रहा है। मृतका की शिनाख्त के प्रयास जारी हैं; प्राथमिक तौर पर उसके आधार कार्ड या सामान से पहचान सुनिश्चित की जा रही है।
शाम ढलने के बाद चोपता-तुंगनाथ रूट पर जोखिम
चोपता से तुंगनाथ तक का लगभग 3.5 से 4 किलोमीटर लंबा यह ट्रेक समुद्र तल से 12,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। दिन में जितना सुहाना दिखता है, शाम ढलते ही यहां का मिजाज उतना ही खतरनाक हो जाता है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अक्सर हिदायत दी जाती है कि यात्री दोपहर बाद मंदिर से नीचे की ओर लौटना शुरू कर दें, क्योंकि शाम 6 बजे के बाद अचानक तापमान गिरने, तेज सर्द हवाओं और रोशनी न होने के कारण इन तीखे मोड़ों पर मामूली सी चूक भी सीधे खाई में धकेल देती है।









