देहरादून, 07 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
Rishikesh Ganga Corridor : मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय में उत्तराखंड के तमाम मेगा प्रोजेक्ट्स की उच्च स्तरीय समीक्षा की। शासन स्तर पर रुके हुए बड़े निर्माण कार्यों और उनकी धीमी गति को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाया है। आला अधिकारियों को मंच से साफ निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के भीतर चल रहे सभी बड़े प्रोजेक्ट्स तय समय सीमा पर पूरे होने चाहिए।
योजनाओं को फाइलों से निकालकर तय डेडलाइन पर जमीन पर उतारने के लिए नया खाका खींचा गया है। मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को सभी कार्यों के मासिक और त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित करने को कहा है। इन निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर अब से हर एक बड़े प्रोजेक्ट की नियमित रूप से सघन निगरानी की जाएगी।
समीक्षा बैठक में ऊर्जा विभाग के अंतर्गत चल रहे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का ब्योरा तलब किया गया। उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन और यूपीसीएल के अधिकारियों से उनके बड़े प्रोजेक्ट्स की मौजूदा प्रगति रिपोर्ट मांगी गई। मुख्य सचिव ने बिजली आपूर्ति में होने वाले नुकसान (लॉस रिडक्शन) को कम करने के लिए वित्तीय और भौतिक लक्ष्य तत्काल तय करने के आदेश दिए हैं।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत शामिल राज्य के सीमांत गांवों के विद्युतीकरण कार्य पर बैठक में विशेष फोकस रहा। इन दूरस्थ गांवों में बिजली ग्रिड और आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम समय पर पूरा होना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऊर्जा विभाग को मासिक टारगेट निर्धारित कर काम आगे बढ़ाने को कहा गया है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की फाइलें भी इस बैठक में खोली गईं। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में बन रहे मेडिकल कॉलेजों का ढांचागत काम जल्द से जल्द निपटाने के सख्त निर्देश स्वास्थ्य और निर्माण विभाग को दिए गए हैं। शासन चाहता है कि इन दोनों मेडिकल संस्थानों में छात्रों की कक्षाएं बिना किसी अतिरिक्त देरी के शुरू कर दी जाएं।
हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य में भी तेजी लाने का टास्क संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया है। हरिद्वार में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए इस कॉलेज का समय पर निर्माण बेहद जरूरी माना जा रहा है।
शारदा घाट के निर्माण कार्य में हो रही लगातार देरी पर मुख्य सचिव ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने काम कर रही कार्यदायी संस्था यूपीडीसीसी के कामकाज के सुस्त तरीके पर सवाल खड़े किए। शासन ने महसूस किया है कि इस कार्यदायी संस्था को तकनीकी और ढांचागत रूप से तुरंत मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
आगामी कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर का मुद्दा प्राथमिकता से उठा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि कॉरिडोर का सिर्फ उतना ही काम अभी शुरू किया जाए जिसे विभाग दिसंबर 2026 तक पूरी तरह खत्म कर सके। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि कुंभ के दौरान अधूरे निर्माण के कारण श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए जा रहे छात्रावासों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। इन निर्माणाधीन छात्रावासों के सुचारू संचालन के लिए पहले से एक ठोस मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। भवन निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद महिलाओं को छात्रावास आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
सचिवालय में हुई इस अहम बैठक में शासन के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहकर अपने विभागों का पक्ष रख रहे थे। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा और सचिव नितेश कुमार झा ने मेगा प्रोजेक्ट्स की रिपोर्ट पेश की। सचिव दिलीप जावलकर, चंद्रेश कुमार यादव, सी. रविशंकर और विनोद कुमार सुमन सहित कई अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी इस उच्च स्तरीय समीक्षा का हिस्सा बने।









