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फीस न भरने पर छूटी थी 10वीं की परीक्षा, अब डीएम की पहल पर फिर से शुरू हुई रुद्र की पढ़ाई

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दून हॉराइज़न, देहरादून (17 सितंबर): विपरीत घरेलू हालात और गंभीर आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई से कटे रुद्र प्रताप नेगी के सिर पर देहरादून जिला प्रशासन ने अपना हाथ रख दिया है। कभी छत छिन जाने के बाद सड़कों पर भटकने की नौबत झेल चुका यह छात्र अब प्रशासनिक सुरक्षा के घेरे में अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करेगा।

मामले की नजाकत को भांपते हुए बाल संरक्षण तंत्र (Child Protection Mechanism) तुरंत हरकत में आया।

नशे की लत में बिका पुश्तैनी मकान, छूटी 10वीं की पढ़ाई

रुद्र के जीवन में संकट की शुरुआत उसकी मां के देहांत के साथ हुई थी। मां की असमय मौत के बाद पिता नशे के गहरे दलदल में फंसते चले गए। इसके बाद परिवार के भीतर उत्पीड़न और आर्थिक बदहाली का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसने इस होनहार छात्र की जिंदगी पटरी से उतार दी।

हालात इतने बिगड़े कि परिवार स्कूल की बकाया फीस तक भरने में नाकाम रहा। नतीजा? छात्र दसवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने से वंचित रह गया।

त्रासदी यहीं नहीं थमी। पिता और चाचा द्वारा पुश्तैनी रिहायशी मकान बेच दिए जाने के बाद रुद्र के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया था। जब खुद के परिवार ने बेसहारा छोड़ दिया, तब इस किशोर ने सीधे कलेक्ट्रेट का रुख कर मदद की गुहार लगाई।

सीडब्ल्यूसी की जांच और तत्काल रेस्क्यू

प्रार्थना पत्र मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मामले की संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी। उन्होंने जिला बाल कल्याण समिति (CWC) को मामले की ग्राउंड स्तर पर जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।

समिति की जांच में पारिवारिक प्रताड़ना और बच्चे के गंभीर मानसिक-शारीरिक संकट की पुष्टि हुई। रिपोर्ट हाथ में आते ही जिलाधिकारी ने तत्काल कानूनी प्रक्रिया के तहत बालक को बाल गृह (Shelter Home) में शिफ्ट करने का आदेश दिया। इससे किशोर को न केवल सुरक्षित छत मिली, बल्कि पोषण और मानसिक संबल की व्यवस्था भी तय हो गई।

प्रशासनिक दखल से मिली टीसी, एसजीआरआर में दाखिला

पुराने विद्यालय द्वारा फीस बकाए के चलते ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) रोके जाने से छात्र का भविष्य अधर में लटका था। शिक्षा विभाग के नियमों और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रशासन ने पिछले स्कूल से तुरंत टीसी जारी करवाई। इसके बाद छात्र का दाखिला प्रतिष्ठित श्री गुरु राम राय (SGRR) स्कूल में सुनिश्चित कराया गया।

जिलाधिकारी ने बाल कल्याण समिति और संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट ताकीद की है कि छात्र के स्वास्थ्य, पढ़ाई और मानसिक पुनर्वास पर लगातार नजर रखी जाए। अब जिला प्रशासन उन अन्य बच्चों की पहचान के लिए भी विशेष सर्वे की तैयारी कर रहा है, जो कठिन घरेलू परिस्थितियों के चलते बुनियादी शिक्षा से दूर हो रहे हैं।

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